Posts

टखनो के उपर पँट के पायचे

  टखनो के उपर पँट के पायचे होना जरूरी है " सहाबा इकराम (र जी) इरशाद फरमाते है के नबी-ए-करीम ( ﷺ ) ने लंबे कपडे मोडने से मना फरमाया" और दुसरी हदीस है के , " नबी-ए-करीम ( ﷺ ) ने कपडा उलटा कर के पहेन्ने से मना फरमाया"। अगर पायचे अंदर की जानीब किये जाए तो मोडना ला û जीम आया और बाहर मोडे जाए तो मोडना और उलटा करना ला û जीम आया। ये दोने काम मकरूह है। इब्ने अब्बास (रजि) रिवायत करते है की रसुलुल्लाह ( ﷺ ) ने फरमाया "मुझे हुकूम दिया गया है के मैं ७ हड्डीयो पर सजदा करू , पेशानी और आप ने हाथ से नाक की तरफ इशारा दिया दोनो हाथो , दोनो घुटनो और दोनो कदमो के पंजे पर और (ये के हम नमाज में) अपने कपडो और बालो को एक्खट्टा ना करे " याद रखीये , नमाज में शलवार (पँट) दबोचना या किसी भी तरीके से कपडे को मोडना मकरूहे तहरिमी है , और एैसा करने पर नमाज लौटाना (फिर से पढना) वाजीब है - ( Bukhari J# १ P# ११३ , Muslim J# १ P# १९३ , Tirmizi J# १ P# २२ , Abu Daud J# १ P# ९४) आप ( ﷺ ) ने इरशाद फरमाया के "एै अबुबकर तुम उन मे से नही है" ( Sahih Bukhari, ५७८४)   पायच...

खुदकुशी करना कैसा है?

  खुदकुशी करना कैसा है ?   १।     खुदकुशी करना हराम है। २।     ह जरत अबु हुरेरा (र û जी) से रिवायत है के , हुजुर ( ﷺ ) ने फरमाया "जिस शख्स ने खुद को पहाड से गिरा कर हलाक किया तो वो दोजख मे जाएगा , हमेशा इस मे गिरता रहेगा और हमेशा हमेशा वही रहेगा। और जिस शख्स ने जहर खा कर अपने आप को खत्म किया तो वो जहर दोजख मे भी इस के हाथ मे होगा जिसे वो दोजख मे खाता होगा और हमेशा हमेशा वही रहेगा। और जिस शख्स ने अपने आप को लोहे के हथीयार से कत्ल किया तो वो हथीयार इस के हाथ मे होगा जिसे वो दोजख की आग मे हमेशा अपने पेट मे मारता रहेगा और हमेशा हमेशा वही रहेगा" ( Sahih al-Bukhari १३६५ and Sahih Muslim- १०९)। इसी तरहा दुसरी रिवायत ये भी जीक्र है के "जो शख्स अपनी जान को फांसी के जरीए खतम करता है तो वो दोजख मे भी एैसा ही करता रहेगा।" ३।     एक साहबी-ए-रसुल से रिवायत है के , हुजुर ( ﷺ ) ने फरमाया "तुम से पहेले लोगो मे से एक आदम जख्मी हो गया , इस ने बेकरार हो कर छुरी ली और अपना जख्मी हाथ काट डाला। जिस से इस का इतना खुन बहा के वो मर गया। अल्लाह तआला न...