टखनो के उपर पँट के पायचे
टखनो के उपर पँट के पायचे होना जरूरी है " सहाबा इकराम (र जी) इरशाद फरमाते है के नबी-ए-करीम ( ﷺ ) ने लंबे कपडे मोडने से मना फरमाया" और दुसरी हदीस है के , " नबी-ए-करीम ( ﷺ ) ने कपडा उलटा कर के पहेन्ने से मना फरमाया"। अगर पायचे अंदर की जानीब किये जाए तो मोडना ला û जीम आया और बाहर मोडे जाए तो मोडना और उलटा करना ला û जीम आया। ये दोने काम मकरूह है। इब्ने अब्बास (रजि) रिवायत करते है की रसुलुल्लाह ( ﷺ ) ने फरमाया "मुझे हुकूम दिया गया है के मैं ७ हड्डीयो पर सजदा करू , पेशानी और आप ने हाथ से नाक की तरफ इशारा दिया दोनो हाथो , दोनो घुटनो और दोनो कदमो के पंजे पर और (ये के हम नमाज में) अपने कपडो और बालो को एक्खट्टा ना करे " याद रखीये , नमाज में शलवार (पँट) दबोचना या किसी भी तरीके से कपडे को मोडना मकरूहे तहरिमी है , और एैसा करने पर नमाज लौटाना (फिर से पढना) वाजीब है - ( Bukhari J# १ P# ११३ , Muslim J# १ P# १९३ , Tirmizi J# १ P# २२ , Abu Daud J# १ P# ९४) आप ( ﷺ ) ने इरशाद फरमाया के "एै अबुबकर तुम उन मे से नही है" ( Sahih Bukhari, ५७८४) पायच...