वो काम जो नमाज के दौरान करना जायज है
वो काम जो नमाज के दौरान करना जायज है
१। नमाज को सही करने के लिए जो अमल हम करते है वो जायûज है। मिसाल के तौर पर - नमाज पढते वक्त मोबाईल बजने लगे तो आप उस फोन को अपनी जेब से निकल कर बंद कर जेब में रख देंगे, पुरे लोगो की नमाज खराब करने से अच्छा ये अमल है। (नोटः नमाज से पहेले एहतियातन मोबाईल फोन बंद कर लेना चाहिए)
२। नमाज को दुरूस्त करने के लिए गलती होने पर सुब्हानल्लाह कहेना जायûज है। इसी तरहा से इमाम किरत भुल जाए गलती हो जाए तो उसे लुकमा देना (सुझाव देना) जायûज है।
३। नमाज के दौरान मामुलीसा काम कर लेना जायûज है, जैसे - कपडो को सिधा करना वगैरा।
४। छिंक, जमाई और खांसी नमाज मे जायûज है। जमाई लेने से अल्लाह के रसुल ने मना फरमाया है, जमाई आई तो मुंह पकड कर जमाई को रोको।
५। मजबुरन थोडा बहोत खुजाना जायûज है।
६। सफबंदी के लिए हलचल जायûज है।
७। नमाज में थोडी बहोत हलचल जायज है। मिसाल के तौर पर - नमाज शुरू करने पर पता चला के सजदे की जगह पर चुंटीया है तो थोडा सा बाजु में हट कर खडे रह सकते है।
८। सिर्फ दो ही लोग जमाअत बना कर पढ रहे है तो मुक्तदी इमाम के सिधे बाजु खडा रहेगा। अगर तिसरा शख्स आ गया तो वो मुक्तदी के बाजु में नही खडे रहे, वो इमाम को पिछे से थोडा सा धक्का देकर थोडा सा आगा करेगा और फिर मुक्तदी के बाजु में खडे रहे कर नमाज पढेगा।
९। नमाज में आप के सामने से कोई जा रहा है तो उस को आप नमाज की हालत में रोक लेंगे। उस के सामने हाथ डाल कर उसे रोक लेना जायûज है। इसी तरहा से किसी चौपाए या बच्चे को रोकने के लिए एक कदम या उस से ज्यादा आगे बढना जायûज है ताके वो उस के पिछे से गुजर जाए।
१०। हदीस - नमाज में दो चिûजे सांप और बिच्छु आ जाए तो उसे कत्ल कर दो। लेहाजा नमाज में सांप और बिच्छु या कोई ûजहिरीले जानवर को मारना जायûज है, अगर इन्हे मारने के लिए नमाज तोडना भी पडे तो जायûज है।
११। नमाजी को अगर कोई सलाम करे तो नमाजी उस को अपनी हथेली से जवाब दे सकता है (हदीस)
दिगर मसलेः
१। सलातुल खौफ (डर की नमाज) और जंग में नमाज पढने वाले जंगजु के लिए काबा की तरफ चेहरा कर के नमाज पढने का हुकूम खत्म हो जाता है। यानी वो शख्स जो इतना बिमार हो के अपना चेहरा काबे की तरफ न ही कर सकता, कश्ती गाडी रेलगाडी या हवाई जहाज में सवार इंसान जिस को नमाज का वक्त निकल जाने का डर हो तो वो किसी भी सिमत चेहरा कर के नमाज पढ सकता है। उस के लिए बहेतर है के वो हो सके तो तकबीर के वक्त किबले की तरफ मुंह करे और फिर उस सवारी के साथ मुडता रहे चाहे जिधर भी स का रुख हो जाए।
२। जंग के वक्त सवारी पर बैठे बैठे भी नमाज पढना जायûज है।
३। सवारी पर सवार आदमी को गिरने का डर हो तो वो बैठ कर भी नमाज पढ सकता है। बैठ कर नमाज पढने वाले के लिए जायûज नही है के वो जमीन पर कोई उंची चिज रख कर उस पर सजदा करे।
४। तहज्जुद की नमाज को बगैर किसी वजह से खडे हो कर और बैठ कर पढना जायûज है। बैठ कर नमाज पढने की शुरूवात करे और किराअत करे और रुकू करने से थोडी देर पहेले खडा हो जाए, और जो आयते बाकी रह गई है उन्हे खडे हो कर पढे, फिर रुकू और सजदे करे, फिर इसी तरहा दुसरी रकात भी पढे।
५। कब्र की और मुंह कर के नमाज पढना हराम है।
६। नमाज की नियतः नियत दिल में करे। मिसाल - -जोहर की फर्ज या सुन्नत- इस तरहा नियत करे।
७। अगर इमाम रुकु में हो और मुक्तदी आ कर रुकू में शामील हो जाए तो उस को वो रकात मिल गई। इस बात पर ज्यादा से ज्यादा उलमाओ का इत्तेफाक है।
८। जमाअत में देर से आनेवाले ने इमाम के सलाम फेरने के बाद (पहेले सलाम के बाद या दोनो सलाम के बाद) अपनी छुटी हुई रकातो को पढने के लिए खडा होना चाहिए।
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