कुर्बानी के मुकम्मल मसाईल
कुर्बानी के मुकम्मल मसाईल १। कुरआन मजीद में अल्लाह तआला फरमाता है के , इन कुर्बानी के जानवरो को ना तो गोश्त अल्लाह को पहोचता है और ना उन का खुन , लेकीन इंसानो के दिलो में जो तकवा है , वो अल्लाह को पहोचता है (सुरे हज (२२) , आयतः ३४-३७) २। आप ( ﷺ ) ने फरमाया , -- सिर्फ मुसीन्ना जानवर ही जुबाह करो , सिवाय इस के तुम्हारे लिए बहोत मुश्कील हो जाए तो भेड का ज û जा जुबाह करो (सहीह मुस्लीम , हदीस१९६३ , अबु दाऊद-२७९७) मुसीन्ना का मतलबः मुसीन्ना बडी उमर या बडे जिस्म वाला जानवर नही जैसा के लोग समझते है , बल्की इस से मुराद वो जानवर है जिस के दुध वाले अगरे २ दांत गिर गए और उस की जगह दुसरे दांत आने शुरू हो जाए। किसी मुल्क मे गाय-बकरी २ साल के बाद तिसरे साल मे २ दांत निकालते है जब के हमारे मुल्क में आम तौर पर २ साल में दो दांत हो जाते है। उंट ५ साल के बाद २ दांत वाला हो जाता है। इसलिए कुर्बानी के जानवरो में सालो और उमरो का ऐतेबार नही बल्की मुसीन्न हो (यानी दो दांत वाला हो)। जानवर के अगर दुध के दांत गिर कर दुसरे दांत ना आए तो एैसा जानवर १० साल का भी...