इस्लाम के पाच सतुन - कलमा, नमाज़, जक़ात, रोजे, हज
इस्लाम के पाच सतुन
कलमा पढ़ना-
उसे खुदा की बादशाहत और मुहम्मद साहब के पैगम्बर होने की घोषणा करनी चाहिए। इसी घोषणा को -कलमा- पढ़ना कहते हैं। इसमें कहा जाता है कि -अल्लाह के अतिरिक्त और कोई खुदा नहीं है और मुहम्मद साहब उसी के पैगम्बर हैं।-
नमाज़ क़ायम रखना-
उसे रोज पाँच बार नमाज़ पढ़नी चाहिए और हरेक ज़ुमा के रोज दोपहर के बाद मस्जिद में नमाज़ पढ़नी चाहिए।
जक़ात देना-
उसे गरीबों को यह समझकर ज़कात (दान) देना चाहिए कि वह अल्लाह के प्रति कुछ अर्पित कर रहा है। यह एक अच्छा काम है।
माहे रमजान के रोजे रखना-
इस्लाम के पवित्र महीने रमजान में उसे रोज़ा(उपवास) रखना चाहिए।
हज करना-
उसे अपनी जिंदगी में अपने सामर्थ्य के अनुसार अथवा कम से कम एक बार -हज- के लिए जाना चाहिए।
Comments
Post a Comment