नमाजी के आगे से गुजरना
नमाजी के आगे से गुजरना
सुतराहः
यहा सुतराह से मुराद वो चिज है जिसे नमाजी अपने आगे खडा कर के नमाज पढता है, ताके इस के आगे से गुजरने वाला सुतराह के आगे से गुजर जाए और गुनाहगार ना हो। ये सुतराह लाठी, बारची, लकडी, दिवार, सुतुन और दरख्त से होता है और इमाम का सुतराह सब मुक्तदीयो के लिए काफी होता है। एक हाथ इतनी लंबी लकडी सुथरा बन सकती है (सुनन अबी दाऊद-८६८)
नमाज की हालत मे नमाजी के सामने से जाने वालो को हाथ के इशारे से रोक ले, ना माने तो उस से झगडा (सहीह मुस्लीम-५०५)
ना-बालीग नमाज के सामने से जाए तो कुछ नही होता।
औरत, गधा या काला कुत्ता नमाजी के सामने से गए तो नमाज टुट जाती है। (सहीह मुस्लीम-५१०)
अगर कोई शख्स नमाजी के आगे बैठा हुआ था तो उठ के जाना चाहे तो जा सकता है, उसे कोई गुनाह नही मिलेगा, सामने से हटना नमाज तोडना नही है।
कोई दुसरा आदमी नमाजी के आगे सुतराह रख सकता है।
इमाम का सुतराह मुक्तदीयो के लिए काफी है। (सहीह हदीस)। चुंके इमाम का सुतराह मुक्तदीयो के लिए काफी है इसलिए अगर कोई शख्स जमाअत में नमाजीयो (मुक्तदीयो) के सामने से गुजर जाए तो भी कोई मसला नही है। हजरत इब्ने अब्बास (रजि) गधा लेकर नमाजीयो (मुक्तदीयो) के सामने से गुजरे थे और उन्हे किसी ने नमाज में नही रोका (सहीह मुस्लीम-५०४, सहीह बुखारी-४७२)
आप (ﷺ) ईद की नमाज के वक्त नेजे को सुतराह के तौर पर इस्तेमाल करते थे। (सहीह हदीस)
सुतराह कम से कम शहादत की उंगली या अंगुठे के लंबाई बराबर मोटा होना चाहिए। (सहीह हदीस)
सुतराह की लंबाई कम से कम देढ फुट होनी चाहिए। (सहीह हदीस)
नमाजी के आगे से गुजरने वाले की सजाः
१। रसुलुल्लाह (ﷺ) ने फरमाया, "अगर नमाजी के सामने से गुजरने वाले को गुजरने की सजा मालुम हो जाए तो इसे एक कदम आगे बढने की बजाए ४० तक वही खडे रहना पसंद हो। अबु नसर (रजि) ने कहा के मुझे याद नही रहा के बसर बिन सईद ने ४० दिन कहे या ४० महिने या ४० साल। (सहीह बुखारी, अल-सलाह, हदीस-५१०, सहीह मुस्लीम, अल-सलाह, हदीस-५०७)
२। रसुलुल्लाह (ﷺ) ने फरमाया, "तुम नमाज अदा करते वक्त आगे सुतराह खडा करो और अगर कोई शख्स सुतराह के अंदर से गुजरना चाहे तो इस की मजहमत करू (इस को रोको) और इसको आगे से ना गुजरने दो (उस को हाथ से रोक लो)। अगर वो ना माने तो उस से लडाई करो, बेशक वो शैतान है। (सहीह बुखारी, अल-सलाह, हदीस-५०, सहीह मुस्लीम हदीस-५०५)
नमाजी के सामने सुतराह ना होने पर कितना हिस्सा छोड कर हम नमाजी के सामने से गुजर सकते है?
सुथरे के आगे से जाने में कोई मसला नही है। लेकीन अगर नमाज के सामने सुतराह नही है तो इस बारे में अलग-अलग उलमाओ के अलग-अलग कौल है।
इमाम अबु हनिफा (रहे) का कौल है के तीन सफ छोड कर (एक उंट की जगह छोड कर) नमाजी के सामने से जा सकते है ।
इमाम शाफई का कौल है के दो सफ छोड कर (गाय गाय बैठनी की जगह छोड कर) नमाजी के सामने से जा सकते है।
इमाम अहमद-बिन-हंबल फरमाते है के एक सफ छोड कर (एक बकरी की जगह छोड कर) नमाजी के सामने से जा सकते है।
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