कुरआन पढने वाला हिदायत पाता है या गुमराह होता है?

 

कुरआन पढने वाला हिदायत पाता है या गुमराह होता है?

 चंद मफाद परस्तो ने कह दिया के कुरआन पढने से गुमराह हो जाओगे इसलिए हमारे कई नादान मुसलमानो ने कुरआन से दुरी इख्तीयार कर ली।।।

 उसी कुरआन को किसी के मरने के बाद जाहिलाना अकिदे से बख्शवाते है लेकीन कभी जिंदगी में उसे खोल 

कर उस के पैगामात पर गौर नही करते।।।।

 आखेरत मे बहोत सख्त मामला होगा उन लोगो के साथ जो अल्लाह की हिदायत के साथ एैसा सुलुक करते

है.....

 कुरआन मे मुसलमानो के लिए अल्लाह की तरफ से मùसेज है लेकीन अफसोस की बात है के हम फेसबुक 

और whatsapp के मेसेज को अल्लाह के मेसेज से ज्यादा पसंद करते है।

 हमे जो भी जबान मे महारत हासील है उस जबान में हम ने कुरआन का तरजुमा (ट्रान्सलेशन) पढना चाहिए

            कुरआन अमल की किताब है

            हम ने वजीफो की किताब बना दिया

            कुरआन समझने की किताब है     

            हम ने पढने की किताब बना दिया

            कुरआन जिंदो का दस्तुर है 

            हम ने मुर्दो का मंशुर बना दिया

            कुरआन इंकलाब की किताब है     

            हम ने सिर्फ सवाब की किताब बना दिया

            कुरआन इल्म की किताब है 

            हम ने उसे ला-इल्मो के हाथ थमा दिया

            कुरआन मुर्दा कौम को जिंदा करने आई है 

            हम ने मुर्दो पर बख्शवाने पर लगा दिया

            कुरआन हिदायत की किताब है     

            हम ने कुरआन ख्वानी मे लगा दिया

 

आईये अल्लाह तआला कुरआन मे क्या फरमा रहा है दखीएः

१।    और हम ने कुरआन को नसीहत के लिए आसान कर दिया है तो क्या कोई है जो इस से नसीहत हासील करे? (सुरे कमर (५४), आयत-१५,१७,२२,३२)

२।    ये कुरआन तो एै नबी हिदायत और रहेमत है मोमीनो के लिए (सुरे नमल (२७), आयत-७७)

३।    जो मेरी हिदायत की पैरवी करेगा वो कभी गुमराह नही होगा (सुरे ताहा (२०), आयत-१२३)

४।    ये अल्लाह की किताब है, नही कोई शक इस में हिदायत है (अल्लाह से) डरने वालो के लिए (सुरे बकरा (२), आयत-२)

५।    गुमराही मे मुबतेला करता है अल्लाह एैसी बातो से बहोतो को और हिदायत फरमाता है इन के जरीए बहोतो को और नही गुमराह करता इस से (कुरआन से) मगर नाफरमानो को (सुरे बकरा (२), आयत-२६)

            पता चला के गुमराह होना या हिदायत पाना ये इंसान के आमाल (नेक और बद नियत) पर है। नेक है तो हिदायत पाएगा और बद (नाफरमान) है तो अल्लाह उसे गुमराह कर देगा।

६।    एै नबी () आप के पास आप के रब की तरफ से एक खुली दलील और निशानी आ चुकी और हिदायत आ चुकी है और रहेमत आ चुकी है (सुरे अनाम (६), आयत-१५७)

७।    और तुम सब मिल कर अल्लाह की रस्सी को मजबुती से थाम लो और आपस में फिरको में मत बटो (सुरे इमरान (३), आयत-१०३)

८।    इरशाद हुआ उतर जाओ तुम दोनो यहा से सब के सब। (और रहोगे तुम) एक दुसरे के दुश्मन फिर अगर आए तुम्हारे पास जो जरूर आएगी मेरी तरफ से हिदायत तो जो पैरवी करेगा मेरी हिदायत की वो ना तो भटकेगा और ना बद-बख्त होगा। (सुरे ताहा (२०), आयत-१२३)

९।    हम ने कहा उतर जाओ यहा से तुम सब, अब होगा ये के जरूर आएगी तुम्हारे पास मेरी तरफ से हिदायत सो जो तो पैरवी करेगे मेरी हिदायत की तो ना कोई खौफ है उन के लिए और ना वो गमगीन ही होंगे (सुरे बकरा (२), आयत-३८)

१०।   बेशक आ गई है तुम्हारे पास अल्लाह की तरफ से रौशनी और किताबे मुबीन दिखाता है उस के जरीये से अल्लाह हर उस शख्स को जो तालीब हो उस की रजा का, सलामती की राहे और निकालता है उन को अंधेरो से रौशनी की तरफ अपने अजन से और चलाता है उन को सिधी राह पर (सुरे मैदाह (५), आयत-१५-१६)

११।   हदीसो से बहोत किस्से मिलते है के रसुलुल्लाह () ने जब यहुदीयो को कुरआन की आयते सुनाई तो उन्हो ने इस्लाम कबुल कर लिया। इसी तरहा से आज गैरमुस्लीम कुरआन पढ कर हिदायत पा रहा है और इमान ला रहा है। कुरआन को सुन कर यहुदी मुसलमान हो सकता है, गैरमुस्लीम इमान ला सकता तो मुसलमान अगर कुरआन पढ ले तो वो गुमराह कैसे हो सकता है?

१२।   हदीसः जब कबर मे फरीश्तो के जरीये पुछे गए तीन सवालो के जवाब देने मे कामयाब हो जाएगा तो फरीश्ते उस से पुछेंगे तुझे कैसे इल्म हुआ? (यानी तुने इस सवाब के जवाबात कैसे दिए?) वो कहता है मैं ने अल्लाह की किताब पढी है, इस पर इमान लाया और इस की तस्दीक की। (Abu Dawood, ४७५३; Ahmad, १८०६३- Sahih) और सहीह बुखारी (हदीस नं.१३७४) में लिखा है के, जब वो शख्स तीनो सवालो के जवाब नही दे पाएंगा तो फरीश्ते उसे कहेंगे की "ना तो तु जानता था और ना ही तुने रहेनुमाई (कुरआन पढ कर) ली"।

१३।   हदीसः रसुलुल्लाह () ने इरशाद फरमाया, एै लोगो आगाह हो जाओ! मैं भी इंसान हुँ, करीब है के मेरे पास मेरे रब का कासीद (मौत का फरीश्ता) आए और मैं उस की बात कबुल कर लु। मैं अपने बाद तुम में दो अजीम चिजे छोड कर जा रहा हुँ। १) पहिली चिज तो अल्लाह की किताब (कुरआन) है, इस मे हिदायत और नुर है, तुम अल्लाह की किताब को पकडो और उस से तालुक मजबुत करो, अल्लाह की किताब अल्लाह की रस्सी है, जिस ने उस की इत्तेबा की वो हिदायत पर है औ जिस ने उसे छोड दिया वो गुमराह हो गया। २) (दुसरी चिज) मेरे अहेले बैत है, मैं अपने अहेले बैत के मुतालीक तुम्हे अल्लाह से डराता हुँ (उन से अच्छा बरताव करना) (सहीह मुस्लीम, किताबुल फजाईल, हदीस नं.६२२८)

१४।   बेशक मै अपने बाद तुम मे दो एैसी चिजे छोड कर जा रहा हुँ के अगर इन्हे मजबुती से पकडलोगे तो कभी गुमराह नही होंगे १) अल्लाह की किताब (कुरआन) और २) उस के रसुल की सुन्नत (जो सहीह हदीस से ही माखुज हो) (Al mustadrak ul Hakim,kitab ul Ilm ३१८)

१५।   हदीसः तुम मे बहेतरीन लोग वो है जो कुरआन सिखे और दुसरो को सिखाए (Sahih Bukhari H#५४५)

१६।   हदीसः कुरआन सिखने के लिए जो शख्स घर से निकला है, अल्लाह रब्बुल इज्जत उस के लिए जन्नत का रास्ता आसान कर देता है (सहीह मुस्लीम)

१७।   कुरआन पढने- पढाने वाले अल्लाह वाले है और ये अल्लाह के चहीते बंदे होते है (सुनन इब्ने माजा)

१८।   कुरआन के पढने-पढाने वालो पर अल्लाह तआला सकीनत नाजील फरमाता है (सुकुन और इत्मीनान नाजील करता है).... फरीश्ते इन की मजलीसो को एहतेराम से घेर लेते है।।। और अल्लाह तआला इन लोगो का जिकर फखर के तौर पर फरीश्तो के सामने करता है .......(सहीह मुस्लीम)

१९।   हदीसः कुरआन का एक सिरा अल्लाह के हाथ मे है और दुसरा सिरा अहले इमान के हाथ में है... बस जो इसे थामे रखेगा दुनिया में गुमराह नही हो सकेगा और आखेरत में हलाक नही होगा... (तिबरानी)

तो पता चला के कुरआन को पढने वाला हिदायत पाता है और नही पढने वाला गुमराह होता है।

 

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