दरगाह पे मुराद कैसे पुरी हो जाती है और दर्गाहो पर करिश्मे क्यु होते है?
अगर बुजुर्ग दुनिया से बेखबर है तो दरगाह पे मुराद कैसे पुरी हो जाती है और दर्गाहो पर करिश्मे क्यु होते है?
गैर-मुसलमान अपने बुतो से मांगते है और उन को भी मिल जाता है, तो वो भी ये कह सकते है के हमारे देवी देवताने हमारी दुआ सुन ली। अगर कोई पत्थर से औलाद मांगे और उसे औलाद मिले तो इस का ये मतलब नही है के पत्थर से मांगना जायûज होगा।
बात ये है के अल्लाह ही देता है चाहे आप सही तरीके से हासील करे या गलत तरीके से। मिलना तो अल्लाह ही से ही है तो शिर्क करना क्यु।
दुनिया में इंसानो के अलावा दुसरी मखलुक भी रहती है, जिसे जिन्न कहते है। अकसर दर्गाहो पर जिन्नातो का कब्जा होता है। जिन्नात आप की कुछ हद तक मदत कर देते है ताके आप का अकिदा दर्गाहो पर कायम रहे, आप इसी तरहा दर्गाह पर आते रहे और शिर्क बिदअत करते रहे। क्युं के शैतान भी जीन्न था और उसने वादा किया था के मैं अल्लाह के बंदो को बहेकाऊंगा और उन्हे अपने साथ दोजख में ले जाऊंगा।
जिन्नातो के बारे में कुरआन में आता है केः
शैतान भी जिन्न था (सुराह कहफ (१८), आयत -५०)
शैतान इंसान का खुला दुश्मन है (सुरे बकरा (२), आयत-१६८)
शैतान आस्मान मे जा कर चोरी छुपे फरीश्तो की बातो को सुनते है और उन के अकाओ तक (नजुमियो तक) आस्मानी बात पहोंचाते है (सुरे हिजर (१५), आयत-१६-१८)
जिन्नात नेक भी होते है और बद भी, मुस्लीम भी होता है और गैर-मुस्लीम भी (कुरआन और हदीस)
जिन्नात के पास बहोत ताकत होती है हजारो मिलो का सफर सेंकड मै तय कर सकते है (सुरे नमल (२७), आयत -३९)
जिन्नात इंसानो को बहेकाते है (सुरे इस्त्रा (१७), आयत - ६१ से ६५)
दर्गाहो पर करीश्मे होते है
आप ने देखा होंगा के किसी दर्गाह पर बिच्छु नही काटता, तो किसी दर्गाह पर वजनी पत्थर इंगलीयो से ही उठ जाता है। इंसान यही सोचरा होता है के ये मजार वाले बुजुर्ग की करामत है। ये सब जिन्नात के करामात है। जो किसी को दिखाई नही देते और करामतो से लोगो को लुभाते रहते है।
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