क्या नबी (ﷺ) को कायनात के चप्पे चप्पे और जररे जररे का इल्म है?
क्या नबी (ﷺ) को कायनात के चप्पे चप्पे और जररे जररे का इल्म है?
अगर मान लिया जाए के नबी (ﷺ) को कायनात के ûजररे-ûजररे और चप्पे-चप्पे का इल्म है तो क्या ये अल्लाह के साथ बराबरी नही है? जो अकिदा अल्लाह के लिए है वही अकिदा नबी या किसी नेक बंदे के लिए रखना शिर्क है।
बरेलवी हजरात निचे दी हुई आयत से गलत दलील ले कर लोगों में शिर्क फैलाते है। वो आयत ये है।
--एै महेबुब अगर अल्लाह का फûजल व रहेमत तुम पर ना होता तो इन में के कुछ लोग ये चाहते के तुम्हे धोका दे दे और वो अपने ही आप को बहेका रहे है और तुम्हारा कुछ ना बिगाडेंगे और अल्लाह ने तुम पर किताब और हिकमत उतारी और तुम्हे सिखा दिया जो कुछ तुम ना जानते थे और अल्लाह का तुम पर बडा फûजल हुआ-- (सुरे निसा (४), आयत-११३)
इस आयत की तफसीर : ये आयत उस वक्त नाजील हुई जब एक शख्स ने चोरी की और इल्जाम दुसरे के सर डाल दिया और नबी (ﷺ) के पास झुठी दलीले पेश कर के नबी को धोका दे कर नबी से गलत फैसला करवाना चाहता था। नबी (ﷺ) अनकरीब उस धोकेबाज आदमी की तरफ से फैसला कर देते लेकीन अल्लाह तआला ने नबी (ﷺ) को वही के जरीये बता दिया के कौन चोर है और नबी (ﷺ) से गलती होने ना दी और दुशमनो की नबी (ﷺ) को बदनाम करने की चाल मे नाकामयाब कर दिया। तो पता चला के ये आयत इसलिए नाजील हुई के नबी (ﷺ) को बताया जाए के कौन चोर है लेकीन बरेलवी इस आयात को दलील बनाते है के, नबी (ﷺ) को अल्लाह तआला ने कायनात के ûजररे-ûजररे और चप्पे चप्पे का इल्म दिया, इस तरहा से बरेलवी आयत के हकीकी माना ना बता कर कुछ और माना बताते है और लोगो को धोका दे कर शिर्क फैलाते है।
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