मौत का गम मनाने की मुदत... शरीयत के मुताबीक गम कैसे मनाए

 

मौत का गम मनाने की मुदत

शरीयत यानी इस्लाम के कानुन के हिसाब से "मौत का गम मनाने की मुद्दत सिर्फ ३ दिन है सिवाय उस औरत के जिस के शोहर का इंतेकाल हुआ हो। जिस औरत के शोहर का इंतेकाल हुआ उस के ४ महिने १० दिन इद्दत के होते है यानी गम मनाने के होते है" [Sure al-Baqarah(२), ayat-२३४] बाकी अफराद के लिए ३ दिन से ज्यादा गम मनाना हराम है और गम भी सुन्नत तरीके से और जायûज तरीके से ही मनाने की इजाûजत है। अगर कोई ईद चौथे या पांचवे दिन आए तो भी आप को ईद मनानी है। बाûज लोग एक एक साल तक गम मनाते है और ईद भी नही मनाते, ये गैर-इस्लामी तरीका है।

 

शरीयत के मुताबीक गम कैसे मनाएः

बुखारी शरीफ की और मुस्लीम शरीफ की रिवायत है, हुजुर () इरशाद फरमाते है "इंसान को अûजाब नही दिया जाता आँखो के आंसुओ पर, इंसान को दिली गम पर कोई अûजाब नही होता चाहे कितने भी दिन गुûजर जाए, मगर वो हम में से नही है जो सिने को चाक कर ले, अपने गिरेबान को चाक कर ले, और अपने कपडो को फाड ले, और बडी बडी बातें करे, चिखे मारें और अल्लाह तआला के खिलाफ कुछ कहे"। लेहाûजा पता ये चला के गम में आँखो से आंसु आए और दिल गम महेसुस करे तो चाहे कितने भी दिन बीत जाए कोई गुनाह नही है और गम मनाने के लिए अपने सिने पर मारना, चिखना चिल्लाना, कपडे फाडना, अल्लाह तआला के लिए गलत अलûफाûज इस्तेमाल करने की इजाजत शरीयत नही दी है।

हदीसे पाक - "जो गिरेबान फाडे, चेहरा पिटे, और जाहिलत की पुकार पुकारे वो हम में से नही" [Sunan-e-Trimizi Kitaab Ul Janaiz Hadees १००१ Page ३०३]

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