तयम्मुम का तरीका

 

तयम्मुम का तरीका (वजु और गुस्ल का एक ही तरीका)

 

तयम्मुम जब किया जाता है जब वजु या गुस्ल के लिए पानी मयस्सर ना हो।

तरीकाः

बिस्मील्लाह हिररमेनानिररहीम (तस्मीया) पढे

दोनो हाथो की हथेलीयो को पाक और साफ मिट्टी पे आहिस्ता से मारे, और अपने पुरे चेहरे को दोने हथेलीयो से मले जिस तरहा वजु में मलते है। (नोट- मिट्टी दस्तीयाब ना होने पर पत्थर से भी तयम्मुम किया जा सकता है या फिर गर्द व गुबार वाली पथरीली/फर्श वाली जमीन जिस पर धुल मिट्टी हो इस्तेमाल की जा सकती है।)। पत्थर से तयम्मुम करते वक्त हाथेलीयो को पत्थर पे मले फिर अपने चेहरे पर हथेलीया मले, फिर पत्थर पर हथेलीया मलकर पहेले सिधे फिर उलटे हाथ को दुसरे हाथ से मले।

फिर मिट्टी पर हथेलीयो को मारे और अपने उलटे हाथ से सिधे हाथ के कोहनी तक मले और सिधे हाथ से उलटे हाथ के कोहनी तक अच्छी तरहा मले और उंगलीयो के दरम्यान खिलाल करे। मलते वक्त कोई बाल बराबर जगह न बचे इस बात का खयाल रखे। आप का तयम्मुम हो गया। वजु और गुस्ल के लिए तयम्मुम का एक ही तरीका है, अगर वजु की नियत से किया तो वजु हो गा और अगर गुस्ल की नियत से किया तो गुस्ल हो गा।

 

तयम्मुम की शर्तेः

पानी का ना होना

पानी है लेकीन इस्तेमाल नही कर सकते। मिसाल - वजु कर ली तो पकाने के लिए पानी नही रहेगा या बिमारी की वजह से डाùक्टर ने पानी इस्तेमाल करने से मना किया है।

मिट्टी का पाक होना

पानी अगर मिल जाए तो तयम्मुम खत्म हो जाएगा, अब पानी से वजु या गुस्ल करना जरूरी है।

नोटः वजु, तहारत, तयम्मुम टुटा के नही टुटा एैसा शक हो तो इस के लिए एक उसुल याद रखीए के, यकीन शक से खत्म नही होता। इस का मतलब ये है के अगर आप को यकीन है के वजु है लेकीन शक है के शायद टुटा होगा तो यकीन को मान लिजीए।

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