तावीज पहेन्ना

 

तावीज पहेन्ना साबीत है या नही?

१। नबी-ए-करीम () और सहाबा से तावीज बांधना साबीत नही है।

२। बहेरहाल! नबी-ए-करीम () से मरीज पर दम करना (हाथ पर फुंक मार के जिस्म पर मलना) साबीत है।

 

शिर्क वाले तावीज

निंबु, भिलावे, राख, मिट्टी, मिर्ची, नारीयल, नाडा, कडा, कंगन, अंडा, हड्डी, कुंकु, काजल और तरहा तरहा तावीजात जो पहेने जाते है, घरो, गाडीयो मे और कारोबार की जगह पर बांधे जाते है ये सब शिर्क वाले तावीज है।

 

अगर तावीज मे कुरआन की आयते है तो

कुरआन की आयतो के तावीज बनाकर पहेन्ना हुजुर () और सहाबा से साबीत नही है। ये शिर्क नही है लेकीन बिदअत जरूर है। इसलीए उल्माओ ने इस के बारे में अलग अलग राय दी है। कुछ उल्माओ ने इस तावीज को पहेन्ने की इजाजत दी और कुछ उल्माओ ने इजाजत नही दी है। क्युंके अगर तावीज पहेन्ने के बाद पहेन्नेवाले का अकिदा अल्लाह से हट कर तावीज पर आ जाता है तो ये शिर्क है। और दुसरी बात बाथरुम वगैरा मे तावीज ले जाने से कुरआन की आयतो की बेहुरमती होती है।

 

क्या तावीज पहेन्नेसे फायदा होता है?

कुरआन मे आया है के शहेद में भी शिफा है लेकीन अगर इसे खाया ना जाए और बाटली में बांध कर गले मे लटकाया जाए तो क्या शहेद का असर हमारी सेहत पर होगा? नही! इसी तरहा से कुरआन के बारे में भी आया है के कुरआन में शिफा है। इसलिए कुरआन पढ कर शिफा मिलेगी ना के कुरआन की आयत को गले में लटका के।

 

शिर्कीया तावीज के बारे में अहादीस (हदीस की जमा)

१।     उकबा-इब्ने-आमीर अल-जुहानी से रिवायत है के, नबी (सल्लाहु अलैहि व-सल्लम) के पास एक जमाअत आई। आप (सल्लाहु अलैहि व-सल्लम) ने ९ लोगो से बैत ली और एक को छोड दिया। लोगो ने कहा एै अल्लाह के नबी आप ने ९ सी बैत ली लेकीन १ को छोड दिया।  आप (सल्लाहु अलैहि व-सल्लम) ने फरमाया "इस लिए बैत नही ली के वो तावीज पहेना हुआ है"। ये सुन कर उन साहब ने हाथ अंदर (शर्ट में) डाला और तावीज को तोड डाला। फिर आप (सल्लाहु अलैहि व-सल्लम) ने उन से बैत ली और फरमाया "जिस ने तावीज लटकाया उस ने शिर्क किया"। ([Masnud Ahmed १६९६९] classed as saheeh (Correct) Shaykh al-baani in al-Silsilah al-Saheehah, ४९२)

नोट - ये तावीज कुरआनी आयत का नही था।

२।     इसा-बिन-हमजा (रजी) कहते है के मै नें अब्दुल्लाह-बिन-हकीम की अयादत करने के लिए गया वो हुमरा (सुर्ख बडा) की बिमारी में मुब्तेला थे। मै ने उन से कहा आप हुमरा के लिए तावीज क्यु नही लटका लेते? उन्हो ने जवाब दिया तावीज से अल्लाह की पनाह, रसुल अलैहिस्सलाम ने इरशाद फरमाया है के जिस ने कोई भी चिज लटकाई वो उस चिज के हवाले कर दिया जाएगा।

३।     रसुलुल्लाह () ने इरशाद फरमाया "जिस किसीने भी तावीज पहेना, अल्लाह उस की ख्वाहीश कभी पुरी ना करे और जिस ने सिप्पी (seashell) पहेना अल्लाह उस की डर से कभी हिफाजत ना करे" (Narrated Ahmad (१७४४०); classed as hasan Shu-ayb al-Arna-oot in Tahqeeq al-Musnad)

 

दिवार पर तुगरे और आयतुल और लोह-कुरआनी लटकाना कैसा है

१।    घर की खुबसुरती बढाने के लिए कुरआन की आयते दिवारो पर लगाना बिल्कुल दुरूस्त नही।

२।    हिफाजत और खैर-व-बरकत के लिए तुगरे और आयतो दिवारो पर लटकाने से हिफाजत और खैर-व-बरकत नही आती है। बल्की हुजुर () से साबीत दुआओ और कुरआनी आयते पढने से आती है।

 

तावीज गंडे एक बिझनेस है जो आपको शिर्क में मुबतेला कर देता है।

मियां बीवी में मोहब्बत का तावीज, निकाह जमने का तावीज, दुकान व मकान की खैर व बरकत का तावीज, हिफाजत का तावीज, मालदार बन्ने का तावीज, औलाद के लिए तावीज, जिन्न व शैतान से हिफाजत का तावीज, प्यार को हासील करने का तावीज, वगैरा वगैरा। (सवाल : क्या इन चिजो के लिए आयते और दुआए नही बनी है)

१।    हर चिज का करने वाला सिर्फ अल्लाह ही है तो फिर भी हम तावीज गंडे वालो के पास क्यु जाते है? इस की एक ही वजह है, हमारा इमान कमजोर है और हम को कुरआन और हदीस का इल्म नही है।

२।    आप अगर किसी आमील के पास जाए कोई भी जरूरत ले के तो वो ये नही कहेगा के इस का इलाज हमारे पास नही, ये तो अल्लाह के हाथ में है। ये तो उस का बिझनेस है, वो तुम्हारी हर जरूरत का तावीज बना कर देगा, चाहे वो जरूरत जायज हो या नाजायज।

 

QURAN

एै नबी () ! आप और आप के पैरोकार अहले इमान को बस अल्लाह ही काफी है

(सुराह अनफाल (८), आयत-६४)

 

आप कह दो के मेरे लिए अल्लाह ही काफी है, और भरोसा करने वाले उसी पर भरोसा करते है

(सुराह जुमर, आयत -३८)

 

और अगर तुझे अल्लाह बुराई पहोंचाए तो इस के सिवा इस का कोई दुर करने वाला नही और अगर तुझे भलाई पहोंचाए तो वो सब कुछ कर सकता है।

(सुरे अनाम (६) की आयत नं.१७)

 

"भला कौन है जो मजबुर की पुकार को कुबुल करता है जब वो उसे पुकारता है, और तकलीफ को दुर करता है? (इलावा अल्लाह के) और तुम को जमीन पर खलीफा बनाता है? क्या अल्लाह के साथ कोई और माबुद भी है? (हरगीज नही) बल्की तुम बहोत कम ही सोचते समझते हो"। [Surah Naml (२७),  Ayat-६२]

 

रसुलुल्लाह () कहा करते थे : तरजुमा - "एै इंसाने के रब! दुर कर दे ये बिमारी और शिफा दे तु ही शिफा देने वाला है, नही कोई शिफा तेरी शिफा के सिवा और (एैसी शिफा जिस से) कोई तकलीफ बाकी ना रहे।

(अबु दाऊद - हदीस-३८८३)

 

और उल्फत डाल दी उन के दिलो में, अगर तुम सब कुछ खर्च कर देते जो जमीन में है उन के दिलों में उल्फत न डाल सकते थे। लेकीन अल्लाह ने उन के दरमियान उल्फत डाल दी, बेशक वो गालीब हिकमत वाला है।

( सुरे अन्फाल (८), आयत - ६३)

 

Pata chala ke dilo ulfat/mohabbat dalne wala Allah hi hai..phir miya biwi me mohabbat ke liye taweez kyu.

 

Comments

Popular posts from this blog

टखनो के उपर पँट के पायचे

वो काम जो नमाज के दौरान करना जायज है

Makeup, Facial, Waxing, Plucking, Threading, Sar ke baal katna, नकली बाल (wick), जुडा (बुछडा), पैरो में घुंगरु, Namaz me nakli jewellery, kangan, Kaan me bali, आवाज का पर्दा, खुश्बु लगा कर घर से बाहर निकलना, औरत का पर्दा, bemaqsad ghar se niklna, Chahre Ka Parda, बालो को कलर करना