क्या नबी (ﷺ) अपनी कबर मुबारक मे जींदा है?

 

क्या नबी () अपनी कबर मुबारक मे जींदा है?

बाज लोग नबी-ए-करीम () की वफात (मौत) को नही मानते। और आप को कबर मे जिंदा तसव्वुर करते है। इस अकिदे की वजह से वो नबी को पुकारते है और मदत की दरख्वास्त करते है और नबी को हाजीर व नाजीर मान कर आप () की रुह मुंबारक हर घर में होती है ये अकिदा रख कर बरेलवी बाहर से घर में दाखील हो ने के बाद नबी () पर सलाम भेजते है।

अगर नबी अपने मजारे मुबारक में दुनियावी जिंदगी जी रहे होते और लोगो की मदत कर रहे होते तो सब से पहेले इमाम अबु हनिफा (रहे) आप () के मजारे मुबारक पे जा कर सवाल करते के मुझे फला फला मसला समझ में नही आ रहा है और वो आप से मसला मालुम कर लेते। इसी तरहा से इमाम बुखारी (रहे) भी आप () के मजारे मुबारक पे जा कर सवाल करते के मुझे बताईये के ये हदीस सहीह है या ûजईफ।

 

हदीस से आप () की वफात के सबुतः

जिस तरहा शहीद जन्नत में जिंदा है और वो दुनिया में दोबारा जिंदा हो कर आ नही सकते उसी तरहा रसुलुल्लाह () जिंदा है लेकीन जन्नत में।

वफाते नबी पर सहाबा इकराम (रिûज) का एक तहलका मच गया था तो अबुबकर सिद्दीक (रिûज) ने कितने सख्त अल्फाज कहे...

हजरत आयशा (रिûज) से रिवायत है के जब मोहंम्मद () की वफात हो गई तो अबुबकर (रिûज) अपने घर से जो सनाह मे था घोडे पे सवार हो कर आये और उतरते ही मस्जीद में तशरीफ ले गए, फिर आप किसी से गुपतगु (बातचित) के बगैर आयशा (रिûज) के घर में आए जहा नबी () की लाशे मुबारक रखी हुई थी। और नबी () के तरफ गए, हुजुरे अकरम को (यमान की बनी हुई चादर) से ढांक दिया गया था, फिर आपने हुजुर () की चादर मुबारक खोला और झुक के इसका बोसा लिया और रोने लगे, आप ने कहा के मेरे "मां-बाप" आप पर कुर्बान हो एै अल्लाह के नबी () अल्लाह तआला दो मौत आप पर कभी जमा नही करेगा सिवा एक मौत के जो आप के मुकद्दर में थी, सो आप वफात पा चुके।

अबु सलमा ने कहा के मुझे इब्ने-अब्बास (रिûज) ने खबर दी के हजरत अबुबकर (रिûज) जब बाहर तशरीफ लाए तो हजरत उमर (रिûज) इस वक्त लोगो से कुछ बातें कर रहे थे। और हजरत उमर (रिûज) कह रहे थे के ये हो ही नही सकता के अल्लाह के नबी () फौत हो जाए। हजरत सिद्दीक अकबर (रिûज) ने फरमाया बैठ जाओ, लेकीन हजरत उमर (रिûज) नही माने, आखीर हजरत अबुबकर (रिûज) ने कलमा-ए-शहादत पढी तो तमाम मजमा आप की तरफ मुतवज्जा हो गया और हजरत उमर (रिûज) को छोड दिया।

हजरत अबुबकर सिदीक (रिûज) ने फरमाया "अम्मा बाद"! अगर कोई शख्स तुम में से मोहंम्मद () की इबादत करता था इसे मालुम होना चाहिए की आप () की वफात हो चुकी, और अगर कोई अल्लाह की इबादत करता है तो अल्लाह बाकी रहने वाला है, कभी वो मरने वाला नही फिर एक आयत तिलावत फरमाई। हजरत उर कहते है के जब मैने ये आयत सुनी तो मुझे एैसा लगा जैसे ये आयत अभी नाजील हुई और मुझे यकीन हो गया के मोहंम्मद () वफात पा चुके है। (Sahih al-Bukhari १२४१, १२४२)

सहाबा का ये खयाल भी हो गया था के "मोहंम्मद () " दोबारा जिंदा होंगे, इसी लिए "हजरत अबुबकर सिदीक (रिûज)" ने फरमाया अल्लाह पाक आप पर दो मौत तारी नही करेगा (यानी आप को दोबोरा जिंदा नही करेगा)। {Sahih-Bukhari, Kitabul-Janayez, Hadis-no-१२४१}

 

इसी तरहा से चारो उलेमा (हनफी, शाफई, मालीकी और हंबली) से भी ये अकिदा साबीत नही है।

 

 

कुरआन पाक से आप () की वफात के सबुतः

१।    "और हम ने तुम (हुजुर ) से पहेले किसी आदमी के लिए दुनिया मे हमेशगी ना बनाई तो क्या अगर तुम इंतेकाल फरमाओ तो ये हमेशा रहेंगे" (सुरे अंबिया (२१), आयत-३४)

२।    "जमीन पर जितने है सब को फना है, और बाकी है तुम्हारे रब की जात अजमत और बुजुर्गी वाला"

(सुरे रहेमान (५५), आयत-२६,२७)

३।    "बेशक तुम्हे (हुजुर सलल्लाहु अलैहि व-सल्लम को) इंतेकाल फरमाना है और इन्हे भी मरना है"

(सुरे जुमर (३९), आयत-३०)

४।    "और हम ने इन (रसुलो) के एैसे जिस्म नही बनाए थे जो खाना ना खाते हो और ना थे वो दुनिया में हमेशा रहने वाले" (सुरे अंबिया (२१), आयत-८)

५।    "तुम (हुजुर सलल्लाहु अलैहि व-सल्लम) फरमाओ बेशक मेरी नमाज और मेरी कुर्बानीया और मेरा जिना और मेरा मरना सब अल्लाह के लिए है जो रब सारे जहा का" (सुरे अनम (६), आयत-१६२)

६।    जंगे-अहद के मौके पर कुपफार ने ये अफवा फैला दी थी के नबी (हुजुर सलल्लाहु अलैहि व-सल्लम) शहीद कर दिए गए है तो ये खबर सुन कर सहाबा इकराम के हौसले पस्त हो गए और उन के कदम लडखडाने लगे तो अल्लाह तआला ने इस आयत का नुजुल फरमाया "और मोहंम्मद तो सिर्फ एक रसुल है इन से पहेले भी रसुल आ चुके है अगर ये फौत हो जाए या कत्ल कर दिए जाए तो क्या तुम उलटे पाव फिर जाओगे वो अल्लाह का कुछ नुकसान नही करेगा और अल्लाह तआला जल्दीही बदला देगा शुक्र करने वालो को" (सुरे इमरान (३), आयत-१४४)

 

नबी की बीवीयो को नबी के वफात के बाद दुसरी शादी की इजाजत क्यु नही है?

सुरे अहûजाब (३३) के आयत नं.६ में अल्लाह तआला फरमाता है के, "नबी की बीवीया नबी की उम्मत की मां है"। क्या माँ से कोई शादी करता है। जब के बरेलवी हजरात का ये कहना गलत है के, नबी जिंदा है इसलिए उन की बीवीयो को दुसरी शादी की इजाûजत नही है।

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