मरने के बाद क्या होता है

 

मरने के बाद क्या होता है

 

आप () ने फरमाया कबर में मुर्दे के पास २ फरीश्ते आते है और इसे बैठाते है और इस से कहते है, १) तेरा रब कौन है? तो वो कहता है मेरा रब अल्लाह है। फिर वो पुछते है २) तेरा दिन क्या है? तो वो कहता है मेरा दिन इस्लाम है। फिर वो पुछते है, ३) ये शख्स कौन है जो तुम में माबुस किया गया था? वो कहता है की वो अल्लाह के रसुल () है। फिर वो कहते है ४) तुझे कैसे इल्म हुआ? (यानी तुने इस सवाब के जवाबात कैसे दिए?) वो कहता है मैं ने अल्लाह की किताब पढी है, इस पर इमान लाया और इस की तस्दीक की। जुरैर की रिवायत में और लिखा है, यही (सवाल-जवाब) मिस्दक है अल्लाह के फरमान का (आयत है)" फिर वो दोनो रिवायत करने मे मुत्तफीक है, आप () ने फरमाया, फिर आस्मान से मुनादी करने वाला एैलान करता है "तहकीक मेरे बंदे ने सच कहा है, इसे जन्नत का बिस्तर बिछा दो और जन्नत का लिबास पहेना दो और इस के लिए जन्नत की तरफ से दरवाजा खोल दो। फिर फरमाया, जन्नत की तरफ से वहा की हवाए, राहते, और खुश्बु आने लगते है, और उस की कबर को इंतेहाई नजर तक वसीह (बडा) कर दिया जाता है।

            फिर काफीर और इस की मौत का जिक्र किया और फरमाया "मरने के बाद इस की रुह इस के जिस्म में लौटाई जाती है और फरीश्ते इस के पास आते है और इसे बैठाते है और इस से पुछते है - तेरा रब कौन? वो कहता है हाय अफसोस मुझे खबर नही है। फिर वो उसे पुछते है - तेरा दिन क्या है? तो वो कहता है हाय हाय मुझे खबर नही। फिर वो उसे पुछते है - ये आदमी कौन है जो तुम में माबुस किया गया था। वो कहता है के हाय हाय मुझे खबर नही। तो मुनादी आस्मान से निदा देता है के इस ने झुठ कहा, इसे आग का बिस्तर बिछा दो, इसे आग का लिबास पहेना दो, और इस के लिए दोजख की तरफ का दरवाजा खोल दो। फरमाया की फिर इसे जहान्नुम की तरफ से तपीश और सख्त गरम हवा आने लगती है और इस पर कबर को तंग कर दिया जाता है हत्ता के इस की फसलीया एक दुसरे में घुस जाती है। जुरैर की रिवायत में और लिखा है की फिर इस पर एक अंधा गुंगा फरीश्ता मुकर्रर कर दिया जाता है जिस के पास भारी गरज (हथोडा) होता है, अगर इसे पहाड पर मारा जाए तो वो पहाड मिट्टी मिट्टी हो जाए। फिर वो इस के साथ एैसे चोट मारता है जिस की आवाज जिनो और इंसानो के अलावा मशरीक व मगरीब के दरमियान मख्लुक सुनते है, और फिर वो रेजा रेजा हो जाता है, फरमाया फिर इस में रुह लौटाई जाती है। (Abu Dawood, ४७५३; Ahmad, १८०६३) 

जब वो शख्स तीनो सवालो के जवाब नही दे पाएंगा तो फरीश्ते उसे कहेंगे की "ना तो तु जानता था और ना ही तुने रहेनुमाई (कुरआन पढ कर) ली"। इस तरहा के अल्फाज सहीह बुखारी में मौजुद है। (सहीह बुखारी १३७४)

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