अल्लाह देता है और नबी बांटते है--इस हदीस का हकीकी मतलब
अल्लाह देता है और नबी बांटते है--इस हदीस का हकीकी मतलब
बरेलवी हजरात के ये मानना है के, अल्लाह ने रसुलुल्लाह (ﷺ) के सुपुर्द हर चिज कर दी है और रसुलुल्लाह (ﷺ) हमे वो हर चिज बांटते है।
आईये देखते है के बरेलवीयो का ये दावा किस तरहा गलत है -
हदीस शरीफ
मावीया (रजि) बयान करते है के, मैं ने नबी (ﷺ) को ये फरमाते हुए सुना के, जिस शख्स के साथ अल्लाह तआला भलाई का इरादा करे इसे दिन की समझ इनायत फरमा देता है। और मैं तो महेज तक्सीम करने वाला हुँ। देने वाला तो अल्लाह ही है और ये उम्मत हमेशा अल्लाह के हुकुम पर कायम रहेगी और जो शख्स इन की मुखालेफत करेगा, इन्हे नुकसान नही पहोंचा सकेगा, यहा तक के अल्लाह का हुकम (कयामत) आ जाए। (सहीह बुखारी, हदीस नं. ७१)
इस हदीस से पता चला के शरीयत को बनाने वाला अल्लाह ही है, नबी (ﷺ) शरीयत बताने है यानी लोगो में दिन तक्सीम करने वाले है। जो इस शरीयत के खिलाफ होगा वो शरीयत का कोई नुकसान नही पहोंचा पाएगा यहा तक के कयामत आ जाएगी।
जब भी दिन की बात हो तो हम यु कहते है के अल्लाह और उस के रसुल बहेतर जानते है लेकीन जहा तौहीद की बात आती है तो सिर्फ अल्लाह ही का नाम लिया जाता है।
मिसाल के तौर पे - एक आदमी ने नबी (ﷺ) से कहा, "वही होगा जो अल्लाह और आप (ﷺ) चाहे तो"। तो आप (ﷺ) ने फरमाया "तुने मुझे अल्लाह तआला का शरीक ठहराया", सिर्फ इतना कहो "वही होगा जो अल्लाह तआला चाहेगा" (Ahmed १/२१४)
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