तहारत और बैतुलखला के मसले... तहारत क्या है? नजासत की किस्में ... पानी की ३ किसमें.... गंदगी.. मजी... मनी और हैज का खुन... नजासत को दुर करने के तरीके
तहारत और बैतुलखला के मसले
१। अगर तहारत के लिए पानी और ढेले ना हो तो टिशु पेपर, न्युज पेपर, रुमाल या कपडे जैसी चिûजो को इस्तेमाल कर के ग्लाजत (गंदगी) को साफ कर ले और जैसे ही पानी हासील हो शर्मगाह को धो ले। एैसे हालात अक्सर सफर के दौरान आते है। खडु भी (chalk, चाùक) ढेले के तौर पे इस्तेमाल किया जा सकता है।
२। जब भी तहारत या बैतुलखला आए और अगर तहारत खाना या बैतुलखला ना हो तो मैदान में इंसानी नûजरो से दूर जाए। नबी अकरम (ﷺ) जब भी हाजत आती थी तो इंसानी नûजरो से बहोत दुर चले जाते थे, उन्हे कोई भी नही देख पाता था।
३। तहारत खाने मे तावीज, लिखी हुई आयात, इल्लाह का नाम ना लेजाए।
४। बैतुलखला मे जाने पर दाया (left) पैर पहेले अंदर डाले। पैर डालने से पहेले ये दुआ पढे "अल्लाहुम्मा इन्नी अऊजुबिका मिनल-खुबुसे वल-खबाईस"। अगर अंदर जाने के बाद दुआ पढने की याद आए तो दिल मे दुआ पढे, मुंह से ना पढे। दुआ पढने से फायदा ये होगा के, बैतुलखला मे जो बेहद गलीज (गंदे) जिन (male aur female दोनो) होते है जो हम के ताडते है और नुकसान पहोंचाते है उनसे हमारी हिफाजत होती है और हमारे और उन के बिच पर्दा आ जाता है जिस की वजह से वो हमे देख नही सकते। बैतुल खला से फारीग होने पर बाहर निकलते वक्त सिधा पैर बाहर डाले और बाहर आने के बाद ये आयत पढे "अल्हम्दु लिल्लाहील-लजी अज-हबा अनी-ईल-अजा व-आफानी" या "गुफरानका" पढे।
५। खुली जगह मे बैतुलखला के लिए बैठे तो चेहरा या पीठ किबले की तरफ कर के ना बैठे। बंद बैतुलखला मे कोई मसला नही है।
६। नबी अकरम (ﷺ) ने फरमाया डरो तीन किसम की मलामतो और लानतो से। १) लोगे के रास्ते, २) सायदार पेड (या फलदार पेड), ३) पानी का कोई घाट (नदी, समंदर या तालाब का किनारा) पर बैतुलखला करने से बचो। ये तिन चिûजे मलामते और लानते है। क्यों के इन चिûजो से लोगो के नुकसान होता है और लोग लानत भेजते रहते है।
७। फारीग होते वक्त (बैतुलखला करते वक्त) बातचीत (गुप‹तगु) करना मना है।
८। दो लोग एक साथ अगर बैतुलखला के लिए जाए तो एक दुसरे से छुप कर बैठे और एक दुसरे से बात ना करे।
तहारत क्या है? नजासत की किस्में
तहारत का मतलब सफाई और पाकीजगी हासील करना है, अपने जिस्म से हर किस्म की गंदगी को पाक करना। नमाज के लिए जिस्म, लिबास, और इबादत की जगह का हर तरहा की निजासत और गंदगी से पाक होना जरूरी है, इसलिए तहारत हासील करना इबादत के लिए जरूरी है।
नजासत दो तरहा की होती है। १) मानवी २) हिस्सी ।
मानवी नजासत नजर नही आती, जैसे के शिर्क, कुफ्र, बिदअत, हसद (जलन), नफरत, किना, बुग्ज वगैरा।
हिस्साè नजासत नजर आने वाली नजासत होती है, जैसा के पेशाब, पाखाना, मजी, मनी, मधी वगैरा।
कुरआन - सुरे तौबा (९) की आयत नं.२८ में अल्लाह तआला इरशाद फरमाता है "एै इमानवालो मुशरीक निरे नापाक है तो इस बरस (साल) के बाद वो मस्जीदे हरम में ना आने पाए।" इस से पता चला के शिर्क करने वाला नापाक है। शिर्क सब से बडी मानवी नापाकी है।
हदीस - अल्लाह के रसुल (ﷺ) इरशाद फरमाते है के मोमीन नापाक नही होता। इस से मुराद के मोमीन का दिल नापाक नही होता। दिल अगर गैरुल्लाह से जुड जाए तो आदमी शिर्क करने लगता है।
कुरआनः
और हम ने आस्मान से पाक पानी नाजील किया पाक करने वाला (सुरे फुरकान (२५), आयत-४८)
अल्लाह तआला तुम पर आस्मान से पानी बरसाता है ताके इस के जरीये तुम्हे पाक कर दे (सुरे अनफाल (८), आय-११)
अगर तुम को पाकी हासील करने के लिए पानी ना मिले तो पाक मिट्टी से तयम्मुम करो। (सुरे माएदा (५), आयत नं.६)
पता चला की तहारत की असल पानी है। और अगर पानी ना मिले तो तयम्मुम से भी पाकी हासील की जा सकती है।
पानी की ३ किसमें हैः
१। तहुर वो पानी जो अपनी असली हालत में बाकी रहे, जैसे - बारीश का पानी, नहेर, दर्या और समंदर का पानी। इस पानी को गुस्ल और वजु के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
२। ताहिर वो पानी जिस में पाक चिûज मिल जाए, जैसे - दुध, शकर, लिंबु, सिमेंट, शरबत, जुस वगैरा। ये पानी खाने पिने के लायक है लेकीन आप को पाक नही करेगा। अगर पानी में कोई पाक चिज गिर जाए जिस से पानी का नाम नही बदलता तो वो पानी भी पाक होगा एैसा उलमाओ ने फतवा दिया है जैसे - पानी में पत्ते गिर जाए या थोडा सा नमक गिर जाए या काफुर मिलाया जाए इन चिजो से पानी का नाम नही बदलता।
३। नजीस अगर साफ पानी में नापाक चिज गिर जाए तो वो नजीस पानी कहलाता है।
पानी को पाकी किस तरहा तै की जाएः
पानी पाक है या नही ये मालुम करने के लिए एक उसुल याद रखीए। जिस पानी में गंदगी गिरने से उस का रंग, मजा या बु बदल जाए वो नजीस पानी कहलाएगा। इन तिनो में से कोईA एक भी तबदीली नजर आए तो पानी नापाक होगा चाहे वो कितना भी बडा हौज क्यु ना हो। समंदर या बहेते हुए पानी में गंदगी गिरने से भी वो नापाक नही होगा क्युंके उस का रंग, मजा और बु जाहीर नही होती।
आप (ﷺ) ने इरशाद फरमाया के "समंदर का पानी पाक है और समंदर का मुरदार (मरा हुआ) जानवर हलाल है।" (नोटः मुरदार जानवर का गोश्त, चमडा और हड्डी नापाक है सिवाय मछली के)
गंदगीः
इंसान के दो रास्तो से जो चिजे निकलती है वो गंदगी कहलाती है, जैसे - पेशाब, पाखाना, मनी, वदी, वजी, हैज और निफाज। इसी तरहा से ûजुबाह करने की वजह से जानवर का जो खुन निकलता है वो भी नापाक है। इंसान का खुन बहेने से वजु नही टुटता क्युंके बहोत से वाकिये मिलते है के सहाबा इकराम जखमी हालत में भी नमाज पढते थे। हजरत उमरे फारूक (रजि) पर कातीलाना हमला हुआ तो आप ने जखमी हालत में भी नमाûज पढी। इसी तरहा से हराम जानवरो का पेशाब और पाखाना भी हराम है।
मजीः
मजी गंदे अश्लिल खयाल से, या अùडल्ट पिच्चर या फोटे दोखने से आता है। जिस के निकलने से मजा खत्म नही होता। इसके निकलने से गुस्ल नही टुटता लेकीन इस को साफ कर लेना चाहिए। मजी नजीस होता है इसलिए इस को पानी से साफ किए बगैर नमाज पढना ठिक नही। हदीस में आता है के कपडे पर जिस जगह मजी लगी हो वहा पानी छिडक लेना काफी है, उसे धोने की जरुरत नही।
मनी और हैज का खुनः
मनी मर्द का गाढा और सफेद होता है और औरत का पतला और पिला होता है। ये जिन्सी तालुकात (सेक्स) के वक्त, या निंद में, या मुश्तजनी (हस्तमैथुन, masturbation) करने पर पुरे प्रेशर से निकल जाता है, जिसके निकल जाने से मजा खत्म हो जाता है। ये निकलने के बाद इंसान नापाक हो जाता है और उस पर गुस्ल फर्ज हो जाता है। मनी नजीस नही होता। जिस कपडे पर मनी लग गया हो उस कपडे पर मनी सुखने के बाद उसे खरोच लेना चाहिए फिर आप उस कपडे पर नमाज भी पढ सकते है।
हजरत आयशा (रजि) से मरवी है की, मैं नबी (ﷺ) के कपडे से मनी को खुरच दिया करती थी फिर आप (ﷺ) उसी कपडे में नमाज अदा फरमा लेते थे (सहीह मुस्लीम, किताबुत-तहारा, हदीस-२८८, अबु दाऊद - ३७१, तिरमीजी-११६)
हजरत आयशा (रजि) बयान करती है की, मैं रसुलुल्लाह (ﷺ) के कपडे से मनी को धोया करती थी फिर आप (ﷺ) नमाज के लिए निकलते और पानी से धोने के निशानात आप (ﷺ) के कपडे में मौजुद होते। (सहीह बुखारी-२२९, सहीह मुस्लीम-२८९, अबु दाऊद-३७३)
मालुम हुआ के धोने के बाद ख्वा कपडे पर मनी के निशानात ही क्यु ना बाकी हो कपडा पाक ही होता है।
हजरत आस्मा बिनते अबु बकर (रजि) से मरवी है के, नबी (ﷺ) ने कपडे को लग जाने वाले हैûज के खुन के मुतालीक फरमाया : --पहेले उसे खुर्चो, फिर पानी के साथ मल कर धो लो, फिर उस में पानी बहा कर उस में नमाज पढ लो-- (सहीह बुखारी-३०७, सहीह मुस्लीम-२९१, अबु दाऊद-३६०, तिरमीजी-१३८, नसाई - १/१५५, इब्ने माजा-६२९)
नजासत को दुर करने के तरीकेः
१। कुत्ता अगर बरतन में मुंह डाले तो उस बरतन को पाक करने के लिए ७ बार पानी से और एक बार मिट्टी से धोना जरूरी है वरना वो बरतन नापाक ही रहेगा।
२। दुध पिता बच्चा कपडे पे पेशाब कर दे तो पानी के छिंटे मारने से नजासत दुर होती है। लडका हो तो छिंडा मारे और लडकी हो तो कपडे को धो ले।
३। मुर्दा जानवर के चमडे नापाक है, उस को पाक करने के लिए उस को रंग देने से उस की नजासत खतम होती है।
४। हजरत उम्मे सलमा (रजि) से मरवी है के, आप (ﷺ) ने इरशाद फरमाया औरत का कपडा या बाल चलते हुए किसी गंदगी पर से गुजर जाए तो आगे वाली जमीन उस को पाक कर देगी। (उम्मे सलमा (रजि) के बाल इतने लंबे थे के जमीन तक पहोंचते थे) यानी कपडे या बाल पर गंदगी चलते चलते लग गई है तो जमीन पर रगडने से गंदगी दुर हो जाएगी।
५। निंद से जागने के बाद दोनो हाथो को ३ मरतबा पानी से धो ले क्युंके पता नही तुम्हारा हाथ रातभर कहा गुजरा (हदीस)
६। पानी ना हो तो ३ पत्थरो से गंदगी (पाखाना) साफ होगी। और पानी ना हो तो पेशाब से पाक करने के लिए ईट, टिशु पेपर, चाùक, कपडा या इस किसम की चिज जो पानी को जûजब करने वालो हो इस्तेमाल की जा सकती है।
७। हैज और निफाज में औरत कुरआन को छु कर पढ नही सकती। कुरआन को बगैर छुए जो सुरे याद हो वो पढ सकती है यहा तक के हाथो में ग्लोज पहेन कर कुरआन को हाथ लगाकर पढती है तो जायûज है (फतवा)।
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