नबी (ﷺ) नुर है या बशर?
नबी (ﷺ) नुर है या बशर?
सुन्नी जमाअत हुजुर (ﷺ) को नुरी बशर यानी नुर से बने हुए इंसान मानते है और इस अकिदे के पिछे एक जईफ हदीस है।
बरेलवीयो का नुर का अकिदा कुरआन और सहीह हदीस से टकराता हैः
बरेलवीयो का अकिदा इंसानी अकल के खिलाफ है ही और साथ कुरआन, तौहीद और इस्लाम के खिलाफ है। इसी तरहा से चारो उलेमा (हनफी, शाफई, मालीकी और हंबली) से भी ये अकिदा साबीत नही है।।।।।।।।
अकल की बातः
१। रसुल (ﷺ) के वालीद अब्दुलाह तो वो खुद अल्लाह के नुर कैसे?
२। अगर सारी मख्लुक रसुलुल्लाह (ﷺ) के नुर से बनी है तो इस मख्लुक में नापाक जानवर जैसे कुत्ता भी है। तो एैसा कहना के रसुलुल्लाह (ﷺ) के नुर से सारी मख्लुक बनी है और रसुलुल्लाह (ﷺ) अल्लाह के नुर से बने हुए है ये कहना अल्लाह की और रसुलुल्लाह (ﷺ) की तौहीन है।
३। हजरत मुसा अलैहिस्सलाम के वक्त अल्लाह के नुर की जरा सी तजल्ली को पहाड बरदाश्त ना कर सकती ना उस वक्त के इंसान। रसुले करीम (ﷺ) नुर होते तो उन्हे किस तरहा सब देख लेते?
४। अल्लाह ने अपना हिस्सा (नऊजुबिल्लाह) जमीन पर भेज कर खुद से ही इबादत कराई?
५। रसुले करीम (ﷺ) इंसानी तौर पर उमर में बडे होते गए। क्या अल्लाह का नुर भी छोटा था और बडा होता गया?
६। अगर आप (ﷺ) मे रुह नही अल्लाह का नुर था तो आप (ﷺ) ने अपने रुहे मुबारक जिक्र कई हदीस में कैसे किया?
७। अगर आप (ﷺ) अल्लाह के नुर थे तो उन्हे इंसानो की तरहा खाने पिने की हाजत क्यु होती थी?
८। आप (ﷺ) नुर थे इसलिए आप का साया मुबारक भी नही था तो आप का ये मोûजजा हदीसो में क्युं नही या, साया मुबारक के बारे में एक भी रिवायत क्यु नही आई।
ये हो गई अकल की बात अब आप को बताते है के तौहीद के खिलाफ कैसे है :
तौहीद क्या है?
मतलबः "मै गवाही देता हुँ अल्लाह के सिवाय कोई इबादत के लायक नही अल्लाह यकता है उसका कोई शरीक नही और मैं गवाही देता हुँ मोहंम्मद (ﷺ) अल्लाह के बंदे और रसुल है।"
पता चला के "अल्लाह को कोई शरीक नही है।" अगर अल्लाह का एक से ज्यादा हिस्सा होता (नऊजुबिल्लाह) तो वो अल्लाह का ही शरीक होता ना। और कलिमा मे दुसरी गवाही ये है के "मोहंम्मद (ﷺ) अल्लाह के बंदे और रसुल है।"
अब कुरआन से देखते हैः
जब नबी (ﷺ) ने नबुवत का ऐलान फरमाया तो मुशरीकीन मक्का (मक्का मे शिर्क करने वाले लोग) ने भी यही एैतेराज उठाया।।।।। जब पहेली उम्मतो ने अंबिया को झुठलाया तो इन सब का सब से बडा एैतराज ये था के आप बशर है, बशर कैसे नबी हो सकता है, अल्लाह को अगर नबी भेजना होता तो किसी फरीश्ते को भेजता, ये नबी नही है, ये हमारी तरहा कहते है, पीते है, इन्हे जुनुन हो गया है, इन के पास मत जाओ। अल्लाह ने इन के बातील और गुमराह नजरीये की नफी फरमाई,।
इस बात को निचे दिये हुए आयतो के जरीए समझीएः
कुरआन : और किस बात ने लोगो को इमान लाने से रोका जब के इन के पास हिदायत आयी मगर इस ने के बोले क्या अल्लाह ने आदमी को रसुल बनाकर भेजा है (सुरा बनी इसराईल (इसरा) (१७), आयत-९४)
फिर आगे अल्लाह फरमाता है....."तुम फरमाओ अगर जमीन में फरीश्ते होते चैन से चलते तो इन पर हम रसुल भी फरीश्ता उतारते। यानी अगर जमीन पर इंसान नही होते और फरीश्ते होते तो रसुल भी फरीश्ता ही होता, लेकीन जमीन पर इंसान है इसलिए रसुल भी इंसान ही है।
पैगंबरो ने अपनी बशरीयत का सबुत देते हुए इस तरहा कहा है....... "इन के रसुलो ने (इस के जवाब में) कहा की हम भी तुम्हारे जैसे इंसान ही है लेकीन अल्लाह अपने बंदो में से जिस पर चाहे एहसान करे" (सुरे इबराहीम (१४), आयत-११)
अल्लाह का इरशाद है...... "और आप उन के सामने एक किस्सा मतलब (एक बस्ती वालो का किस्सा) उस वक्त बयान किजीए जब की उस बस्ती में कई रसुल आए, यानी जब हम ने उन के पास (पहेले) दो को भेजा तो उन लोगो ने (पहेले) दोनो को झुठा बताया फिर तिसरे (रसुल) से मालुम किया तो उन तिनो ने कहा की हम तुम्हारे पास भेजे गए है, उन लोगो ने कहा तुम तो हमारी तरहा मामुली आदमी हो" (सुरे यासीन (३६), आयत १३-१५)
और एक आयत मुलाहेजा किजीए....... "तो उन की कौम में जो काफीर रईस (मालदार) थे वो कहने लगे की ये इंसान सिवाय इस के तुम्हारी तरहा एक मामुली आदमी है और कुछ नही इस का मतलब ये है की तुमसे बरतर (बहेतर) होकर रहे और अल्लाह को (रसुल भेजना) मंजुर होता तो फरीश्तो को भेजता, हम ने ये बात अपने पहेले बडो में नही सुनी, बस ये एक आदमी है जिसे जुनुन हो गया है तो खास वक्त तक उस की हालत का इंतेजार करो" (सुरे मोमीनुन (२३), आयत २४-२५)
और आगे है ....... "बस ये तो तुम्हारी तरहा एक आदमी है, ये वही कहता है जो तुम कहते हो और वही पिता है जो तुम पिते हो और अगर तुम अपने जैसे एक आदमी के कहने पर चलने लगे तो बेशक तुम घाटे में हो।" (सुरे मोमीनुन (२३), आयत-३३-३४)
अल्लाह का इरशाद है...... "और ये लोग मतलब जालीम लोग (और काफीर) चुपके चुपके कानाफुसी करते है की ये (नबी अलैहिस्सलाम) सिर्फ तुम जैसे एक आदमी है तो क्या तुम फिर भी जादु (की बात) सुन्ने को उन के पास जाओगे जब की तुम जानते हो" (सुरे अंबिया (२१), आयत-३)
तो लोगो के जवाब मे अल्लाह का इरशाद है....... "और हम ने आप से पहेले सिर्फ आदमीयो हो को पैगंबर बनाया जिस के पास हम वही भेजा करते थे तो (एै इंकार करने वालो) अगर तुम को (ये बात) मालुम ना हो किताब वालो से मालुम कर लो" (सुरे अंबिया (२१), आयत -७)
और अल्लाह ने आप (ﷺ) को हुकम दिया की ये कहे....... "आप कह दिजीए की मैं तो बस तुम्हारे जैसा ही इंसान हुँ मेरे पास तो बस एक वही आती है की तुम्हारा माबुद एक ही माबुत है" (सुरे कहफ (१८), आयत-११०)
कुरआन से और दलीलेः
१। आप कह दिजीए की पाक है अल्लाह मैं तो सिर्फ बशर (और) रसुल के और क्या हुँ। (बनी इसराईल (१७), आयत-९३)
२। दर हकीकतन अल्लाह ने मोमीनो पर बडा एहसान किया है, जब इन्ही मे से एक रसुल इन में भेजा। (सुरे इमरान (३), आयत-१६४) - यानी इंसानो में अल्लाह ने इंसान को रसुल बना कर भेजा।
३। बेशक तुम्हारे पास एक रसुल आये है, जो तुम्हारी जिनस से है। (सुरे तौबा (९), आयत-१२८)
४। और मैं तुम से नही कहता के मेरे पास अल्लाह के खजाने है और ना मैं खुद गैब जानता हुँ और ना मैं ये कहता हुँ के मैं इंसान नही फरीश्ता हुँ" (सुरा हुद (११), आयत-३१)
५। अल्लाह तआला के नजदीक ईसा (अलैहिस्सलाम) की मिसाल हु-ब-हु आदम (अलैहिस्सलाम) जैसी है जिन्हे मिट्टी से बना कर फरमा दिया के (इंसान) हो जा! पस वो हो गया ! (सुरे इमरान (३), आयत नं.५९)- पता चला के इंसान मिट्टी से बना है ना के नूर से।
सहीह हदीसो से दलीलेः
६। अबु हमरा-नस-बिन इमरान कहते है के सय्यदना इब्ने अब्बास (रिûज) ने हमे कहा, क्या मैं आप को अबुजर (गिफरी रिज) के कबुले इस्लाम के बारे में खबर ना दुँ? हम ने अरज की, हा! आप ने कहा, मैं गिफर कबीले का फर्द था। "हम तक ये खबर पहोंची के मक्का में एक आदमी जाहीर हुआ है, जो नबी होने का दावा करता है"। मै ने अपने भाई (अनिस गिफरी) से कहा, आप इस आदमी के पास जाए और इस से बात चित करे, मेरे पास इस के बारे में खबर लाए, वो चला गा और आप से मुलाकात की, फिर वापस आया, मै ने कहा, आप के पास क्या खबर है? इस ने कहा "अल्लाह की कसम! मैं ने एक आदमी को देखा है, जो खैर व भलाई का हुकूम देता और बुराई से मना करता है"। (Sahih Bukhari १/४९९, H। ३५२२, aur sahih Muslim २/२९७, H. २४७४)
७। अरवा-बिन-जुबैर कहते है के मै ने सय्यदना अब्दुल्लाह-बिन-उमर आस (रिûज) से कहा के मुशरीकीन मक्का ने नबी (ﷺ) के साथ जो सख्त तरीन मामला किया है, इस की मुझे खबर दें, वो कहने लगे के एक दफा रसुल (ﷺ) काबे के सहेन में नमाज पढ रहे थे के अचानक अकबा-बिन-अबिमुयीत आया, इस ने आप को कांधे से पकडा और अपना कपडा नबी (ﷺ) की गर्दन मुबारक में डाल कर सख्ती से आप का गला घोटा, सय्यदना अबुबकर तशरीफ लाए और इस को कांधे से पकड कर इसे रसुल (ﷺ) से दुर कर दिया और ये आयत फरमाई : "क्या तुम एैसे आदमी को कत्ल करने के दर पे हो, जो ये कहता है के मेरा रब अल्लाह है और वो तुम्हारे पास तुम्हारे रब की तरफ से रौशन निशानीया ले कर आया है" (सुरे मोमीन (४०), आयत-२८) (SAHIH BUKHARI २/७११-७१२, H. ४८१५)
पता चला के सय्यदना अबुबकर का भी अकिदा था के नबी बशर है।
८। सय्यदना अबु हुरेरा (रिûज) कहते है के मै ने रसुल (ﷺ) को ये फरमाते हुए सुना है "एै अल्लाह! बेशक मोहंम्मद बशर है, इस को गुस्सा आ जाता है, जिस तरहा एक बशर को गुस्सा आ जाता है" (sahih muslim २/३२४, Hadis २६०१)
९। सय्यदा उम्मे सलमा (रिûज) से रिवायत है के रसुलुल्लाह (ﷺ) ने फरमाया "मै तो बशर हुँ, तुम मेरे मुकद्दीमात लाते हो, हो सकता है के कोई अपने दलाईल दावा के नशीब वा फराज की निस्बत ज्यादा समझदारी पेश करे, मैं (बिलफर्ज) दलाईल की समाअत की बुनियाद पर इस के हक में फैसला सुना दुँ, (याद रखो) जिस को मैं (दलाईल की जाहीरी कुवत के पेशे नजर) इस के भाई को मामुली सा भी हक काट कर दे दुँ, वो इसे ना ले, यकीनन मै ने इसे आग का तुकडा काट कर दिया है" (Sahih Bukhari २/६२, Hadis ७१६९, aur SAHIH MUSLIM २/७४, HADIS १७१३)
१०। सय्यदना समराह-बिन-जनदाब कहते है के नबी (ﷺ) ने सहाबा किराम के इजतेमा से खिताब फरमाया : "लोगो! मैं बशर हुँ और अल्लाह का रसुल हुँ" (Musnad ahmed ५/१६, TABRANI ६७९४, ६७९९, mustadrak haakim १/३२९-३३०, Abu daud १८४, nasai ४८४, tirmizi ५६२)
११। सय्यदना राफे-बिन खदीज अन्सारी (रिûज) से रिवायत है के नबी (ﷺ) ने फरमाया "यकीनन मै बशर हुँ, जब मैं तुम्हे कोई भी दिनी हुक्म दुँ तो इस पर (सख्ती से) अमल पैरा हो जाओ और जब मैं तुम्हे अपनी राय से हुक्म दु तो मैं बशर हुँ" (Sahih muslim २/२६४, Hadis २३६२)
१२। कासीम-बिन-मोहंम्मद (रिûज) कहते है के सय्यदा आयशा (रिûज) से नबी (ﷺ) के अमुरे खाना (घर के काम) के बारे में पुछा गया तो इन्हो ने कहा " आप (ﷺ) बशरो में से एक बशर थे, अपने कपडो से जुअे तलाश करते, अपनी बकरीयो का दुध धोते और अपने काम खुद करते थे" (Musnad ahmed ६/२५६, shumaail tirmizi ३६३, aladab almufrad Bukhari ५४१, sharah sunnah ३६७६)
१३। रसुलुल्लाह (ﷺ) ने इरशाद फरमाया, सब से पहली चिज जो अल्लाह ने पैदा फरमाई वो कलम थी, फिर उस से कहा के लिखो, तो उस कलम ने कहा क्या लिखुं? अल्लाह तआला ने फरमायाः तकदीर लिखो, कयामत तक कायम होने वाली हर हर चिûज की। (तिरमीजी- किताबुल कद्र, हदीस-२१६२, अबु दाऊद, किताबुस सुन्नाह, हदीस-४७००, ४६८३ वगैरा)
१४। सय्यदा आयशा (रजि) रिवायत करती है के, रसुलुल्लाह (ﷺ) ने फरमाया फरीश्तो को नुर से, इब्लीस को जलादेने वाली आग से पैदा किया गया और हजरत आदम (अलैहिस्सलाम) के बारे में पहेले वûजाहत हो चुकी है (सहीह मुस्लीम-२९९६)
कुरआन और सहीह हदीस से पता चला के नबी (ﷺ) बशर है ना के नुरी बशर । लेकीन हमारे नबी आम इंसानो की तरहा नही है उन का दर्जा और मुकाम कायनात में सब से आला है और आप के बेशुमार मोजजात है ।
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