फर्ज नमाज की इकामत पुकारने के बाद कोई भी नमाज काबीले कबुल नही
फर्ज नमाज की इकामत पुकारने के बाद कोई भी नमाज काबीले कबुल नही
अबु हुरेरा (रजि) से रिवायत है के, रसुलुल्लाह सलल्लाहु अलैहि व-सल्लम ने फरमाया "जब नमाज के लिए इकामत कही जाए तो फर्ज नमाज के अलावा कोई नमाज काबीले कबुल नही होती" (सुनन अबी दाऊद-१२६६)
जब फर्ज नमाज की इकामत पुकारी जाए और कोई सुन्नत नमाज पढ रहा हो तो उस को नमाज तोडनी होगी। यहा तक के अगर वो तिसरी रकात पढ रहा था तब भी उसे नमाज तोडनी होगी। और अगर उसका आखरी तशहुद बाकी था तो नमाज को ना तोडे बल्की जल्दी से नमाज मुक्कमल कर के जमाअत में शामील हो जाए।
फजर की नमाज के वक्त अकसर ये देखने मिलता है के, जमाअत खडी है और लोग आ कर सुन्नत नमाज पढ रहे है, ये बिल्कुल गलत बात है, एैसी नमाज बातील हो जाएगी।
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