IMAN AND KUFR (ईमान और कुफ़्र)

 

IMAN AND KUFR (ईमान और कुफ़्र)


ईमान
हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम फरमाते हैं कि ईमान ये है कि तू इस बात की गवाही दे कि अल्लाह के सिवा कोई माअबूद नहीं और मुहम्मद सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम अल्लाह के रसूल हैं और ईमान ये है कि तू खुदाए तआला और उसके रसूलों उसके फ़रिश्तों उसकी किताबों और क़यामत के दिन और तक़दीर पर यक़ीन रखे |
(मुस्लिम,जिल्द 1,सफह 438)

 

कुफ़्र

काफीर से कुफ्र लफ्ज़ बना है। काफीर का मतलब होता है इस्लाम की बातो (कुरआन, हदीस व सुन्नत) से इन्कार करने वाला ।

 

जादू टोना करना कुफ्र है।

किसी भी अम्बिया की शान में अदना सी गुस्ताखी या बे अदबी करना कुफ़्र है|

अपने किसी दुश्मन को देखकर ये कहना कि मलकुल मौत आ गया करीब कल्मये कुफ्र है|

क़ुरान की आयतों से मज़ाक करना कुफ्र है

किसी से नमाज़ पढ़ने को कहा और उसने जवाब दिया कि बहुत पढ़ ली कुछ नहीं होता काफिर हो गया

रमज़ान के रोज़े रखने को कहा और जवाब दिया कि रोज़ा वो रखे जिसके घर खाने को ना हो काफिर हो गया

Qayamat, farishte,Jannat,Dozakh, hisaab ko na manna ya Namaz, Roza, haj, Zakat ko farz na janna ya quraan ko Allah ka kalaam na samjhna, kaba,Quraan ya kisi Nabi ya Farishta ki tauheen karni ya kisi sunnat ko halka batana. Sharyat ke hukum ka mazaq udana aur aisi he islaam ki kisi baat ka inkaar karna ya usme shak karna yaqinanan kufr hai

 


युंहि किसी मुसलमान को काफ़िर कहना कुफ़्र है

Hazrat Abdullah ibne Omer Radiallahu Taala Anhu Se Riwayat Hai ki Rasool Allah Sallalahu Alaihi Wa Sallam Ne Farmaya Jab Koi Shaks Apneey Musalman Bhai Ko Kafir Kehta Hai Toh Dono Mai Sey Koi Ek Shaks Uss Kufr Key Saath Louta _(Yaani Agar Jissey Kafir Kaha Gaya Woh Kafir Nhi Hua Toh Kehne Wala Khud Kafir Ho Jaeynga_(Sahih Bukhari Shareef ,Kitab ul Adab ,HadeesNo-6104)

 

 

Kufr se related kuch ayate

 

- अल्लाह उन लोगों को कैसे मार्ग दिखायेगा जिन्होनें ईमान के बाद कुफ्र किया? (सूरह आले-इमरान, 3: 86,87)

- रहे वो लोग जिन्होंनें अपने ईमान के बाद कुफ्र किया और फिर कुफ्र में बढ़ते गये, उनकी तौबा कदापि स्वीकार नहीं होगी। बस यही राह से भटके हुये लोग हैं। (सूरह आले-इमरान, 3:90)

- जिस दिन कितने ही चेहरे उज्ज्वल होंगें और कितने ही चेहरे काले पड़ जायेंगें (उनसे कहा जायेगा) क्या अपने ईमान के बाद तुमने कुफ्र किया? तो जो कुफ्र तुम करते थे, उसके बदले में यातना का मजा चखो। (सूरह आले-इमरान, 3:106)

- ये लोग अल्लाह की कसमें खातें हैं कि हमने नहीं कहा, हालांकि इन्होंनें निश्चय ही कुफ्र की बात कही है और अपने इस्लाम के पश्चात् कुफ्र किया है। (सूरह तौबा, आयत-74)

- यह इस कारण है कि ये ईमान लाये फिर कुफ्र किया तो इनके दिलों पर ठप्पा लगा दिया गया अब ये समझते नहीं। (सूरह अल-मुनाफिकून, आयत-3)

-जो व्यक्ति ईमान लाने के बाद इंकार करे। (वह अगर) मजबूर किया गया और दिल उसका ईमान पर संतुष्ट हो (तब तो ठीक है) मगर जिसने दिल की रजामंदी से कुफ्र को स्वीकार कर लिया उसपर अल्लाह का गजब है और ऐसे सब लोगों के लिये बड़ा अजाब है। (सूरह नहल, आयत-106)

- एक हदीस में नबी (सल्ल0) ने फर्माया था "जिसने जानबूझकर नमाज छोड़ी उसने कुफ्र किया।" एक अन्य हदीस में फर्माया, "मोमिन और काफिर के बीच सिर्फ नमाज का फर्क है।"

- हजरत अब्दुल्ला बिन उमर रिवायत करतें हैं कि रसूल (सल्ल0) ने इर्शाद फरमाया, "जिस शख्स ने अपने मुसलमान भाई को काफिर कहा तो कुफ्र उन दोनों मे से किसी एक की तरफ जरुर लौटेगा।" (मुस्लिम)

- हजरत अबूजर से रिवायत है कि उन्होंनें रसूल0 (सल्ल0) को इर्शाद फरमाते सुना, "जिसने किसी शख्स को काफिर या अल्लाह का दुश्मन कहा, हालांकि वह ऐसा नहीं है तो उसका कहा हुआ खुद उस पर लौट आयेगा।" (मुस्लिम)

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