हैज के मसले (Period / Menses)
हैज के मसले (Period / Menses)
हैज एक खुन का
नाम है जो बालिगा औरत के रहन से आता है और ये औरत की सेहत की निशानी है और अल्लाह
तआला ने औरत के जिस्मानी निजाम की दुरूस्तगी को कायम रखने के लिए ये लाûजीम
करार दिया है। जब औरत हमल से होती है तो ये खुन बंद हो जाता है और यही खुन बच्चे
की गिजा बन जाता है। औरतो के जिस्मानी तालुक से मुख्तलीफ औरत में मुख्तलीफ हैज के
दिन होते है। जैसे ही खुन आना बंद हो जाए औरत को चाहिए के गुस्ल कर के अपनी इबादते
शुरू कर दे। खुन बंद होने के बावजुद भी बे-वजह खुद को नापाक समझ कर इबादते छोडना
बिल्कुल जायûज नही। हैज की हालत में भी और जिक्र अजकार, दुआ, हिफाजत
की दुआए, हिफाजत के लिए आयतुलकुर्सी पढ सकती है।
Tumse
(nabi sallallahu alaihi wasallam) puchhte hai haiz ka hukm tum farmao wo
naapaki hai to aurto se alag raho HAIZ ke dino me aur unse Nazdiki na karo
Jabtak wo paak na ho le
(Sure
Baqra: Ayat-222)
Allah ne is ayat ke zariye logoko bata dia ke haiz k dino me aurto se sirf SHOHBAT (humbistari) karna jaiz nahi baaqi sab ta-aluqat jaiz hai
HAIZ va NIFAS ke dino me aurato par namaze muaaf he inki kazaa bhi nahi albatta rozo ki kazaa dusre dino me rakhna farz hai
१। हैज की कम से कम मुत ३ दिन और ûज्यादा से ज्यादा १० दिन।
२। अगर खुन १ दिन या २ दिन आया फिर बंद हो गया और तिसरे दिन पुरे दिन खुन नही आया तो इस का मतलब ये है के ये २ दिन हैज के नही है बल्की किसी बिमारी की वजह से वो खुन आया जिसे इस्तेहाजा कहते है। कम से कम ३ दिन खुन आएगा तो हैज होगा। इन २ दिनो की छोडी हुई नमाûजे पढना जरूरी है।
३। हैज का मतलब ये नही के दिन भर खुन जाता रहे। अगर दिन भर मे एक या दो बार। एक-दो बुंद भी खुन आए तो हैज ही है। अगर पुरा दिन एक बुंद भी खुन नही आए तो हैज से पाक है।
४। हैज का खुन लाल रंग का ही होना जरूरी नही। फुकहा (Islamist Jurist) ने हैज ६ रंग बयान किए है। काला, लाल, हरा, आùरेंज, गदला (मिक्स रंग का), मिटयाला (मिट्टी के रंग का)। सिर्फ सफेद रुतुबत हैज नही है।
५। खुन का जाना अगर १० दिन से उपर चला जाए तो फिर ये हैज नही है।
६। अगर छटे दिन खुन आना बंद हो जाए तो सातवे दिन का इंताजार करे, फिर ७ वे दिन गुस्ल कर के पाक हो जाए और नमाûजे शुरू कर दे।
७। अगर ६ दिन हैज आया, ७ वा दिन पुरा दिन हैज (खुन) नही आया और आपने गुस्ल करके नमाûजे शुरू कर दी। अब ८ वे या ९ वे दिन दोबारा खुन शुरू हो गया तो एैसी सुरत मे
७ वा दिन भी हैज मे ही शामील हो जाएगा। इसमे नमाûज पढ भी ली है तो गुनाहगार नही होंगे क्यों के पता नही था खुन बाद मे आएगा या नही आएगा। अगर १० वे दिन के बाद खुन आए तो हैज का खुन नही है।
८। हमल के दैरान जो खुन आता है वो हैज नही होता।
९। लडकी के बालीग होने की उम्र ९ साल से १५ साल है। अगर इस दरम्यान उसे खुन आ गया तो हैज है। अगर ९ साल की अम्र से पहेले खुन आया तो ये हैज नही है।
१०। दो हैजो के दरम्यान जो पाकी के दिन होते है इन्हे अरबी मे तुहूर कहते है। तुहूर की कम से कम मुत १५ दिन है। १५ दिन से पहेले खुन आए तो हैज नही होगा बल्की इस्तेहाजा (बिमारी का खुना) होगा। मिसाल के तौर पे - हैज के बाद पाकी के दिन शुरू हुए। पाकी के अगर १५ दिन पुरे नही हुए और १५ दिन से पहेले खुन आ गया तो जब तक १५ दिन पुरे नही हो जाते ये खुन इस्तेहाजा है, हैज का खुन नही होगा। नबी करीम (सलल्लाहु अलैहि व-सल्लम) ने तुहूर तय किया है। दो हैजो के दरम्यान के १५ दिन तुहूर के है। अगर तुहूर के दिनो मे खुन जाए तो औरत नमाûज पढ सकती है और रोजे भी रख सकती है।
११। किसी औरत को अगर हर महिने ६ दिन ही खुन आता है। तो इसे उस औरत की आदत कहेंगे। अगर २ महिने लगातार ६ दिन ही हैज आया और तिसरे महिने १० से ûज्यादा खुन गया तो इस बारे में फुकहा ने फरमाया के उस औरत की आदत बदल गई। लेहाजा उसके ६ दिन ही हैज गिने जाएंगे और बाकी के दिन इस्तेहाजा मे गिने जाएंगे। इस्तेहाजा के दिनो मे जितनी भी नमाûजे छुुटी है सब पढना जरुरी है।
हैज (period) की हालत मे औरत कौन सी दुआए पढ सकती है?
हैज की हालत मे औरत कुरआन नही पढ सकती और छु भी नही सकती। हैज की हालत मे कुरआन सुनने मे कोई हरज नही है। हैज की हालत मे औरत हिफाजत की दुआए पढ सकती है और वो आयते जो दुआओ की शकल मे है पढ सकती है। हिफाजत के लिए आयतलकुर्सी भी पढ सकती है।
हा अगर कोई औरत बच्चो को कुरआन पढाने के काम करती हो तो वो कुरआन को बराहेरास्त (डायरेक्ट) हाथ लगा नही सकती, उसे चाहिए के छडी का इस्तेमाल कर के पढाए और बच्चे को कोई लप‹ज पढना ना आए तो वो लप‹ज पढ कर बता सकती है लेकीन खास तौर से कुरआन नही पढ सकती।
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