इस्लाम के चार उसुल है १। कुरआन २। सुन्नत (सहीह हदीस) ३। इजमा (उम्मत की एक राय) ४। इज्तेदाद (सोच, कयास, Personal Opinion)
इस्लाम के चार उसुल है
१। कुरआन
२। सुन्नत (सहीह हदीस)
३। इजमा (उम्मत की एक राय)
४। इज्तेदाद (सोच, कयास, Personal Opinion)
हमारे सामने अगर कोई मसला पेश आए तो पहेले हम कुरआन से मसले का हल देखेंगे, अगर कुरआन में हल ना मिले तो हदीस (सुन्नत) में देखेंगे और अगर कुरआन और सुन्नत में भी हल ना मिले तो उम्मत का इजमा देखेंगे और अगर इन तीनो में भी ना मिले तो फिर हम इज्तेहाद (अपनी सोच से) मसले का हल निकालेंगे।
कुरआन, सुन्नत, इजमा और इज्तेहाद की दलीले
१। "अल्लाह की बात मानो और अल्लाह के रसुल की बात मानो और वो लोग जिन के पास इल्म है, अगर उल्मा मे इख्तेलाफ है तो फिर से अल्लाह और अल्लाह के रसुल पर लौट जाओ (सुरे निसा (४), आयत-५९)
_इस आयत से चार बाते पता चली_
१। कुरआन से मसले का हल निकालो (कुरआन)
२। हदीस से मसले का हल निकालो (सुन्नत)
३। कुरआन और सुन्नत में हल ना मिले तो उम्मत का इत्तेफाक (एक राय) देखो (इजमा)
४। अगर मसले का हल कुरआन, सुन्नत और इजमा में ना मिले तो कुरआन और हदीस की रौशनी में सोचो (इज्तेहाद)।
२। और जो रसुल के खिलाफ करे बाद इसके के हक रास्ता इस पर खुल चुका और मुसलमानो की राह से जुदा राह चले हम उसे उस के हाल पर छोड देंगे और उसे दोजख में दाखील करेंगे और क्या ही बुरी जगह पलटने की (सुरे निसा (४), आयत-१५५)
मिसाले
१। सुरे मैदाह (५) की आयत नं.६ हमे बताती है के नमाज के पहेले वजु करो। कुरआन से हुकूम मिला वजु का।
२। हमे हदीस से ये बात पता चलती है के जिस्म के एक-एक हिस्से को तीन-तीन बार धोना चाहिए। तो हदिस से तरीका मिला वजु का।
३। रमजान में पुरा महिना भर ईशा के बाद तरावीह पढना ये उमर (रजि) के दौर में सहाबा के इजमा से साबीत है
४। कोकेन हराम है ये इज्तेहाद (सोच, कयास) से साबीत है।
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