अंबीया/prophets/ पैगंबर..... नबी और रसुल मे क्या फर्क है?.... खुलफा-ए-राशीदीन कौन है

 

अंबीया (नबी की जमा) /prophets/ पैगंबर

नबी की जमा (plural) अंबीया है। दुनिया मे अल्लाह तआला ने कम व बेश १,२४,०००/- (एक लाख चौबीस हजार) नबी भेजे। जिन मे से कुरआन शरीफ मे २५ अंबीया के नाम मौजुद है। और आखरी नबी हुजुर () है। 

 

नबी और रसुल मे क्या फर्क है?

अल्लाह ने जिन नेक बंदो को अपने मख्लुक की हिदायत और रहेनुमाई के लिए अपना पैगाम ले कर भेजा उन्हे रसुल कहते है। नबी और रसुल के माना मे कोई भी फरक नही है। नबी वो है जो बगैर किताब के तशरीफ लाते है और रसुल वो है जो नई शरीयत (इस्लामी कानुन) और नई किताब के साथ तशरीफ लाते है। रसुल पर वही आती है। हर रसुल नबी हो सकते है लेकीन हर नबी रसुल नही हो सकते। नबी के माना होते है गैब की खबर देने वाला।

मिसाल के तौर पे - १) तौरात - हûजरत मुसा अलैहिस्सलाम पर नाजील हुई, २) जबुर - हûजरत दाऊद अलैहिस्सलाम पर नाजील हुई थी, ३) इंजील- हûजरत ईसा अलैहिस्सलाम पर नाजील हुई, और ४) कुरआन - हûजरत मोहंमद मुस्तफा () पर नाजील हुई। इन चार कितोबा को आस्मानी किताबे कहते है। कुरआन शरीफ को छोड कर हर किताब को लोगो ने बदल डाला है। कुरआन की जिम्मेदारी खुद अल्लाह ने ली है इसलिए आज तक इस मे कोई बदल नही कर पाया। हा ये बात और है के कुछ गलत अकिदे वाले आयतो का गलत मतलब निकाल कर अपनी बात को साबीत करने की कोशिश करते है।

 

खुलफा-ए-राशीदीन कौन है

 

चार खलीफाओ को खुलफा-ए-राशीदीन कहते है १) हûजरत अबुबकर (रजि.), २) हûजरत उमर (रजि.), ३) हजर उस्मान (रजि.) और ४) हûजरत अली (रजि.)। खलीफा का मतलब होता है इस्लामी रियासतो पर हुकुमत करने वाला।

हुजुर () की वफात के बाद मुसलमानो के मसले और इस्लाम रियासतो के मसले, देखभाल और जिम्मेदारी के लिए कोई तो रहेनुमा (लिडर, रास्ता दिखाने वाला) होना जरूरी था इसलिए हûजरत अबुबकर (रजि.) पहेले खलीफा बनाए गए। खलीफा (Governer) का काम मुस्लमानो की लिडरर्शिप करना होता था और लोगो को सही रास्ता बताना और गुनाहो से बचाना होता था। इस तरहा दुसरे खलीफा हûजरत उमर (रजि.) बने, फिर तिसरे हजर उस्मान (रजि.) और फिर चौथे हûजरत अली (रजि.) खलीफा बने। खुलफा-ए-राशीदीन अपने अपने वक्त मे दिन और इस्लाम को फैलाने की लागातर कोशीश करते रहे।

Abu Bakar(R.A) Ki Khilafat 2 saal rahi..
Umar(R.A) Ki Khilafat 10 saal rahi..
Usman(R.A)Ki Khilafat 12 saal rahi
Aur Ali(R.A) ki Khilafat 4 saal rahi

Note : Khulfa-e-Rashidin sahabi the. Sahabi ka matlab hota hai "saathi". Jis Musalman Ne Imaan Ki Haalat Mein Pyaare Nabi (Sallallaho Alaihi Wasallam) Ka Deedar Kiya Ho Aur Imaan Par Hi Us Ka Khatima Hua Ho, aise Khushnaseeb Musalmano Ko Sahabi Kehte Hain.

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